देश के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। बढ़ते धुएं, धूलकण और जहरीली गैसों के कारण वातावरण में मौजूद प्रदूषक कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि प्रदूषण लंबे समय तक बना रहे, तो यह केवल खांसी या गले में खराश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी समस्या पैदा कर सकता है।
प्रदूषण से कौन-कौन सी फेफड़ों की बीमारियाँ बढ़ रही हैं?
1. क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)
प्रदूषित हवा में मौजूद फाइन पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) फेफड़ों के एयरवे को संकुचित कर देते हैं। लगातार इस तरह की हवा में सांस लेने से व्यक्ति धीरे-धीरे COPD का शिकार हो सकता है। यह बीमारी फेफड़ों की क्षमता को कम करती है और सांस लेने में स्थायी दिक्कत पैदा करती है।
2. अस्थमा का बढ़ना
अस्थमा के मरीज प्रदूषण के मौसम में अधिक प्रभावित होते हैं। धूल, धुआं और एलर्जन अस्थमा अटैक को ट्रिगर करते हैं और कई बार अस्पताल में भर्ती तक की नौबत आ सकती है।
3. फेफड़ों में फाइब्रोसिस का खतरा
बहुत अधिक प्रदूषण फेफड़ों के ऊतकों पर चोट पहुंचाता है। लंबे समय में यह फेफड़ों में कठोरता बढ़ा सकता है, जिसे फेफड़ों का फाइब्रोसिस कहा जाता है।
4. निमोनिया का जोखिम
बच्चों और बुजुर्गों में प्रदूषण से निमोनिया तेजी से फैल सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह और अधिक खतरनाक हो सकता है।
5. कैंसर का खतरा
कई शोध बताते हैं कि अत्यधिक वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का जोखिम भी बढ़ाता है। खासकर उन लोगों में, जो पहले से धूम्रपान करते हैं, खतरा कहीं अधिक होता है।
कौन से लक्षण बताते हैं कि फेफड़े हो रहे हैं प्रभावित?
लगातार सूखी खांसी
सांस फूलना या छोटी दूरी चलने पर भी थकान
सीने में जकड़न या दर्द
घरघराहट (Wheezing)
गला बार-बार बैठना
बार-बार सर्दी-खांसी होना
सुबह उठते समय बलगम की मात्रा बढ़ जाना
यदि ये लक्षण कुछ दिनों से अधिक बने रहें या अचानक गंभीर रूप लेने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
कैसे करें प्रदूषण से अपने फेफड़ों की सुरक्षा?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रदूषण अधिक होने पर घर से कम निकलें और यदि बाहर जाना जरूरी हो तो N95 या उच्च गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करें। घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल भी प्रभावी हो सकता है। इसके अलावा, फेफड़ों को मजबूत रखने के लिए भाप लेना, हाइड्रेटेड रहना और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार का सेवन फायदेमंद माना जाता है।
फेफड़ों की बीमारी से पहले ही सावधान रहना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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