शहरों में बढ़ते हवा प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो प्रदूषण न केवल सांस की बीमारी बल्कि साइलेंट स्ट्रोक यानी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के होने वाले स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा सकता है। साइलेंट स्ट्रोक अक्सर बिना किसी चेतावनी के होता है, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
साइलेंट स्ट्रोक क्या है?
साइलेंट स्ट्रोक वह स्थिति है जिसमें मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं में ब्लॉकेज या चोट होती है, लेकिन व्यक्ति को आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसके बावजूद यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक, मेमोरी लॉस, डिमेंशिया और मानसिक कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
प्रदूषण और साइलेंट स्ट्रोक का संबंध
हाल के अध्ययन बताते हैं कि PM2.5 और PM10 जैसे हानिकारक कणों से रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है। ये कण धमनियों में सूजन और ब्लड क्लॉटिंग की समस्या बढ़ा सकते हैं, जिससे साइलेंट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में प्रदूषण अधिक है, वहां मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग वाले लोग अधिक संवेदनशील होते हैं।
कौन हैं अधिक जोखिम में
हृदय रोग या उच्च रक्तचाप वाले लोग
मधुमेह के मरीज
बुजुर्ग और 50 वर्ष से ऊपर के लोग
वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग
डॉक्टरों का कहना है कि इन समूहों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सावधानी और रोकथाम के उपाय
मास्क का इस्तेमाल: उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों में बाहर निकलते समय एन95 मास्क का प्रयोग करें।
स्वस्थ आहार: ताजे फल, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 युक्त भोजन और अधिक पानी पीना मदद करता है।
नियमित जांच: रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
वजन नियंत्रण और व्यायाम: हल्की एक्सरसाइज या योग करें, लेकिन अगर हवा बहुत प्रदूषित है तो घर के अंदर व्यायाम करें।
स्मोकिंग और शराब से बचें: ये जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।
डॉक्टर की सलाह
डॉक्टरों का कहना है कि साइलेंट स्ट्रोक अक्सर अनदेखा किया जाता है, लेकिन इसके लक्षण जैसे थोड़ी सी भूलने की आदत, संतुलन बिगड़ना या सिरदर्द को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव करने से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है।
यह भी पढ़ें:
अक्षय खन्ना को लगे 7 जोरदार थप्पड़, धुरंधर का यह सीन मचा रहा धमाल
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check