निमोनिया सिर्फ लंग्स ही नहीं, जोड़ों को भी करता है प्रभावित, जानें कैसे

सर्दियों के मौसम में निमोनिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर सामने आता है। आम धारणा यही है कि यह सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि निमोनिया का असर सिर्फ लंग्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जोड़ों और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

निमोनिया और शरीर पर प्रभाव

निमोनिया के दौरान फेफड़ों में सूजन और संक्रमण होता है। इसके कारण शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब संक्रमण फैलता है, तो यह जोड़ों में सूजन और दर्द का कारण बन सकता है। इस स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में “सेप्टिक आर्थराइटिस” कहा जाता है।

जोड़ों पर पड़ने वाला असर

निमोनिया के संक्रमण से शरीर में सूजन बढ़ती है, जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। यह समस्या विशेषकर बुजुर्गों और उन लोगों में अधिक देखने को मिलती है जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। लंबे समय तक untreated संक्रमण से जोड़ों की संरचना पर स्थायी असर भी पड़ सकता है।

अन्य संभावित जटिलताएं

विशेषज्ञों का कहना है कि निमोनिया केवल फेफड़ों और जोड़ों को ही प्रभावित नहीं करता। यह हृदय और गुर्दे जैसी अंगों पर भी असर डाल सकता है। गंभीर मामलों में मरीज को सीप्सिस (संपूर्ण शरीर में संक्रमण) का खतरा भी हो सकता है, जिससे अंगों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

बचाव और सावधानी

निमोनिया से बचाव के लिए विशेषज्ञ कई उपाय सुझाते हैं:

टीकाकरण – हर साल फेफड़ों के संक्रमण के लिए वैक्सीन लेना जरूरी है।

हाइजीन और संक्रमण से बचाव – हाथों को नियमित धोएं और भीड़-भाड़ वाले स्थानों में मास्क का प्रयोग करें।

संतुलित आहार और व्यायाम – प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए पोषक तत्वों वाला आहार और हल्का व्यायाम जरूरी है।

जल्दी इलाज – खांसी, बुखार या सांस लेने में कठिनाई महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

विशेषज्ञों की सलाह

फेफड़ों के विशेषज्ञ, कहते हैं कि “निमोनिया सिर्फ एक सामान्य श्वसन समस्या नहीं है। अगर समय पर इलाज नहीं किया गया, तो यह जोड़ों और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।”

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