PM की दावत और ओवैसी का परहेज़: क्या सियासी नफे-नुकसान का हिसाब

पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, भारत लौटे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सरकारी आवास पर मुलाकात की। इस डिनर मीटिंग में कांग्रेस नेता शशि थरूर, सुप्रिया सुले, सलमान खुर्शीद और मनीष तिवारी जैसे कई प्रमुख नेता मौजूद थे। लेकिन सबकी नजरें तलाश रही थीं – असदुद्दीन ओवैसी को, जो इस बार नज़र नहीं आए।

विदेश में आतंकवाद के खिलाफ भारत की आवाज़ बुलंद करने वाले ओवैसी, इस खास दावत में शामिल नहीं हुए। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है – क्या यह सिर्फ एक संयोग था या कोई सियासी रणनीति?

🤝 ओवैसी की राष्ट्रवादी भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने जिस तरह से पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया, वह काफ़ी चर्चा में रहा। उन्होंने मुस्लिम देशों में जाकर पाकिस्तान के आतंकी चरित्र को उजागर किया।
उनका कहना था –

“पाकिस्तान को ऐसा सबक मिलना चाहिए कि फिर कभी पहलगाम जैसी हरकत न कर सके।”

ओवैसी ने खुलकर भारतीय सेना और सरकार के कदमों का समर्थन किया, और दुनिया के सामने भारत की छवि मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाई।

🕯️ डिनर से दूरी: ओवैसी का स्पष्टीकरण
डिनर पार्टी में गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठने पर ओवैसी ने ANI से कहा:

“मैं देश से बाहर था, दुबई में एक मेडिकल इमरजेंसी के चलते जाना पड़ा। यह जानकारी मैंने प्रतिनिधिमंडल के नेता बैजयंत पांडा को पहले ही दे दी थी।”

उनका दावा है कि यह एक निजी कारण था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे एक रणनीतिक दूरी के रूप में भी देखा जा रहा है।

🧭 संयोग या सियासी चाल?
मोदी सरकार की दावत का ऐलान पहले ही हो चुका था। फिर भी ओवैसी उस दिन भारत में नहीं थे।
क्या यह सच में इत्तेफाक था या चुनावी मौसम में अपनी मुस्लिम वोटबैंक की नाराज़गी से बचने की एक सावधानीपूर्वक रणनीति?

दरअसल, ओवैसी का राजनीतिक आधार मोदी विरोध और मुस्लिम भावनाओं की वकालत पर टिका है। इससे पहले जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की थी, तब भी उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

📌 बिहार चुनाव और ओवैसी की सावधानी
बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और ओवैसी पर पहले ही आरोप लगते रहे हैं कि वे बीजेपी के साथ ‘मैच-फिक्सिंग’ कर रहे हैं।
ऐसे में अगर उनकी पीएम मोदी के साथ कोई तस्वीर या मुलाकात सामने आ जाती, तो यह उनके खिलाफ हथियार बन सकता था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिनर पार्टी से दूरी बनाकर उन्होंने एक सियासी जोखिम टाल दिया।

🇮🇳 विदेश में राष्ट्रवादी, देश में विपक्षी?
ओवैसी ने विदेश में खुलकर कहा कि

“भारत में मुस्लिम पूरी तरह सुरक्षित हैं।”

लेकिन भारत लौटकर उन्होंने टीवी इंटरव्यू में कहा:

“बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा में मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं।”

इस बदलते रुख को लेकर भी उन पर सवाल उठ रहे हैं – क्या यह विदेश में छवि सुधारने और देश में वोट बचाने की दोहरी रणनीति है?

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