आजकल लोगों में स्वास्थ्य और डाइट को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। खासकर आटे का चुनाव, जो रोज़मर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है, अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं रह गया। बाज़ार में उपलब्ध सादा आटा (Refined/Whole Wheat Flour) और मल्टीग्रेन आटा दोनों में से कौन सा अधिक स्वास्थ्यवर्धक है, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है।
सादा आटे की विशेषताएं
सादा आटा, जिसे आमतौर पर गेहूं का आटा कहा जाता है, भारतीय रसोई में सबसे अधिक इस्तेमाल होता है। इसमें अधिकांशतः कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है और यह ऊर्जा का त्वरित स्रोत है।
फायदे:
आसानी से पचता है
रोटी, पराठा और अन्य व्यंजनों में आसानी से इस्तेमाल होता है
सामान्य डाइट में त्वरित ऊर्जा प्रदान करता है
नुकसान:
इसमें फाइबर की मात्रा कम होती है
विटामिन और मिनरल्स की कमी
अधिक सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है
मल्टीग्रेन आटे की विशेषताएं
मल्टीग्रेन आटा गेहूं, जौ, बाजरा, रागी, चना और अन्य अनाजों के मिश्रण से बनाया जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन्स की मात्रा अधिक होती है। यह स्वास्थ्य को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाता है।
फायदे:
पाचन सुधारता है: फाइबर की उच्च मात्रा से कब्ज और पेट की समस्याएं कम होती हैं
ब्लड शुगर नियंत्रित रखता है: धीमी पचने वाली कार्बोहाइड्रेट्स से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है
हृदय स्वास्थ्य: मल्टीग्रेन आटे में मोनो और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं
वजन नियंत्रण में मददगार: लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है
अच्छा पोषण: प्रोटीन, आयरन, जिंक और विटामिन B कॉम्प्लेक्स की उपलब्धता
विशेषज्ञों की राय
डायटिशियन और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सामान्य लोगों के लिए मल्टीग्रेन आटा ज्यादा फायदेमंद है। यह न केवल पोषण से भरपूर है, बल्कि रोजमर्रा के खाने में शामिल करने से ब्लड शुगर, वजन और पाचन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।
हालांकि, सादा आटे की तुलना में इसका स्वाद और बनावट अलग हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे आदत डालकर रोजमर्रा की डाइट में मल्टीग्रेन आटे को शामिल करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है।
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