मोबाइल आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसके साथ जुड़ा एक छोटा सा उपकरण — फोन चार्जर — अगर सही न हो तो गंभीर खतरे का कारण बन सकता है। हाल ही में सरकार ने सस्ते और बिना प्रमाणित मोबाइल चार्जरों को लेकर चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि बाजार में बिक रहे कई लोकल और नकली चार्जर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते, जिससे शॉर्ट सर्किट, आग लगना और बिजली का झटका लगने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
सरकार की चेतावनी: “सर्टिफाइड चार्जर ही इस्तेमाल करें”
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने मिलकर चार्जर निर्माण और बिक्री से जुड़ी नई सेफ्टी गाइडलाइंस जारी की हैं। सरकार ने साफ कहा है कि सभी चार्जर BIS सर्टिफिकेशन वाले होने चाहिए।
गैर-प्रमाणित चार्जर का उपयोग न केवल फोन की बैटरी को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उपयोगकर्ता की जान को भी खतरे में डाल सकता है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, सस्ते चार्जर में इस्तेमाल होने वाली तारें और सर्किट क्वालिटीहीन होते हैं। इनमें ओवर-वोल्टेज कंट्रोल सिस्टम नहीं होता, जिससे चार्जिंग के दौरान अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। यह गर्मी बैटरी फटने या आग लगने का कारण बन सकती है।
पिछले कुछ महीनों में कई शहरों से मोबाइल चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट और ब्लास्ट की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद सरकार हरकत में आई है।
कैसा होना चाहिए सुरक्षित चार्जर
सरकारी गाइडलाइन के अनुसार, एक सुरक्षित चार्जर में ये बातें जरूर होनी चाहिए:
BIS मार्क (IS 13252 Part 1): यह प्रमाणन दर्शाता है कि चार्जर भारतीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप है।
ओवर-वोल्टेज प्रोटेक्शन: यह फीचर बिजली के अधिक दबाव से बचाता है।
फायर-रेसिस्टेंट बॉडी: चार्जर का बाहरी आवरण ऐसी सामग्री से बना हो जो गर्मी में भी आग न पकड़ सके।
अर्थिंग और सर्ज प्रोटेक्शन: बिजली में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए यह फीचर आवश्यक है।
सिर्फ ब्रांडेड चार्जर का इस्तेमाल करें
सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे हमेशा फोन कंपनी या प्रमाणित ब्रांड्स के चार्जर का ही उपयोग करें। “फुटपाथ या ऑनलाइन अज्ञात विक्रेताओं से खरीदे गए सस्ते चार्जर खतरनाक हो सकते हैं,” मंत्रालय ने कहा।
इसके अलावा, चार्जर को लंबे समय तक सॉकेट में लगाकर न छोड़ने की सलाह भी दी गई है।
स्मार्टफोन कंपनियों से भी जिम्मेदारी तय
सरकार ने मोबाइल कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों को सुरक्षित चार्जर उपलब्ध कराएं और हर उत्पाद पर स्पष्ट रूप से BIS नंबर अंकित करें। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को सुरक्षा गाइडलाइन के बारे में जागरूक करने की अपील की गई है।
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