UTI (Urinary Tract Infection) एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। यह मूत्र मार्ग के संक्रमण के कारण होता है और सही समय पर इलाज न मिलने पर लंबे समय तक लक्षण बने रह सकते हैं। जबकि किसी भी उम्र का व्यक्ति इससे प्रभावित हो सकता है, कुछ लोग विशेष रूप से ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
UTI के लक्षण
- बार-बार पेशाब आना
- पेशाब करते समय जलन या दर्द
- पेशाब का रंग बदलना (गहरा या खून के साथ)
- पेट या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
- शरीर में थकान और हल्का बुखार
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो किडनी में संक्रमण या अन्य जटिलताएं भी हो सकती हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित 4 श्रेणियाँ
1. महिलाएं
- महिलाओं में मूत्र मार्ग छोटे और सीधे होने के कारण बैक्टीरिया जल्दी प्रवेश कर जाते हैं।
- गर्भावस्था और हार्मोनल बदलाव भी जोखिम बढ़ाते हैं।
2. पुराने लोग (60+ उम्र)
- उम्र बढ़ने के साथ मूत्र मार्ग की मांसपेशियां कमजोर होती हैं।
- ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने पर बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं।
3. डायबिटीज के मरीज
- उच्च ब्लड शुगर से मूत्र में शुगर बढ़ जाता है, जो बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
- डायबिटीज के मरीजों में UTI जल्दी गंभीर हो सकती है।
4. पानी कम पीने वाले लोग
- पर्याप्त पानी न पीने से मूत्र में बैक्टीरिया जमा रहते हैं।
- पानी की कमी मूत्र की सफाई और संक्रमण रोकने की क्षमता कम कर देती है।
UTI से बचाव और इलाज
- पानी पर्याप्त पिएं – दिन में 7–8 गिलास पानी पीने से मूत्र मार्ग साफ रहता है।
- साफ-सफाई पर ध्यान दें – पेशाब के बाद सफाई और गीले कपड़ों से दूरी बनाएं।
- डाइट में बदलाव – प्रोबायोटिक, नींबू पानी और हरी सब्जियों को शामिल करें।
- बाथरूम जाने की आदत – पेशाब को लंबे समय तक रोकें नहीं।
- डॉक्टर से सलाह लें – संक्रमण की पुष्टि और एंटीबायोटिक उपचार जरूरी है।
UTI किसी के लिए भी परेशान कर सकता है, लेकिन महिलाएं, बूढ़े लोग, डायबिटीज मरीज और पानी कम पीने वाले लोग विशेष रूप से अधिक जोखिम में हैं। समय पर जागरूकता और सही जीवनशैली अपनाने से लंबे समय तक लक्षणों और संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
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