कर्ज़ में डूबा पाकिस्तान: 76 ट्रिलियन रुपये का बोझ, बजट का आधा हिस्सा सिर्फ ब्याज में गया

पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन गंभीर होती जा रही है। देश गहरे कर्ज़ के दलदल में फंसा हुआ है, जहां से निकलने का रास्ता फिलहाल मुश्किल नजर आता है। वित्त वर्ष 2025 तक पाकिस्तान का कुल कर्ज़ 76.01 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुका है। इसमें 51.52 ट्रिलियन रुपये घरेलू कर्ज़ और 24.49 ट्रिलियन रुपये बाहरी कर्ज़ शामिल है।

किससे कितना कर्ज़ लिया पाकिस्तान ने?
बाहरी कर्ज में पाकिस्तान ने विभिन्न स्रोतों से कर्ज उठाया है:

IMF, वर्ल्ड बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB), इस्लामिक विकास बैंक (IDB) जैसी संस्थाओं से

मुस्लिम मित्र देशों जैसे:

सऊदी अरब – $5 अरब

चीन – $4 अरब

यूएई – $2 अरब

कतर – $1 अरब

2024-25 में पाकिस्तान को कुल $23 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है, जिसमें से $12 अरब सिर्फ इन चार मुस्लिम देशों से ली गई अस्थायी जमा राशि है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि ये देश इस कर्ज को “रोलओवर” (आगे बढ़ाने) की अनुमति दे देंगे, ताकि तत्काल भुगतान का बोझ टाला जा सके।

किन ऋणों की अदायगी में नहीं मिलेगी राहत?
बचे हुए $11 अरब डॉलर की अदायगी में पाकिस्तान को रियायत मिलना मुश्किल है। इसमें शामिल हैं:

वर्ल्ड बैंक, ADB, IDB से: $2.8 अरब

बांड धारकों को चुकाना है: $1.7 अरब

कॉमर्शियल लोन: $2.3 अरब

द्विपक्षीय ऋण (जैसे जापान, अमेरिका): $1.8 अरब

इन ऋणों पर न केवल उच्च ब्याज दर लागू होती है, बल्कि इनमें अधिकांश को समय पर चुकाना अनिवार्य है।

बजट पर कर्ज़ का दबाव
पाकिस्तान सरकार ने 2025-26 के लिए 17.573 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का बजट घोषित किया है, जिसमें से 8.2 ट्रिलियन रुपये (46.7%) सिर्फ कर्ज चुकाने और ब्याज देने के लिए निर्धारित किया गया है। यह देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा ऋण भुगतान हिस्सा है।

इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास योजनाओं पर पड़ रहा है।

आर्थिक संकट से बढ़ी गरीबी
शहबाज शरीफ सरकार भले ही आर्थिक सुधारों के दावे कर रही हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि आम नागरिकों की हालत और बिगड़ रही है। वर्ल्ड बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में 44.7% आबादी अभी भी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है।

महंगाई, बेरोजगारी और मूलभूत सुविधाओं की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
साथ ही, IMF के साथ हुए समझौतों के चलते पेट्रोल, गैस और बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी में भी कटौती की गई है, जिससे जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।