बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है और इसी बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर अपने तीखे और तेज़ तेवर दिखाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछली बार की 4 सीटों का जवाब इस बार 24 सीटों से देंगे। साथ ही वक्फ संपत्तियों और मस्जिदों को लेकर सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, “हम मस्जिद नहीं छोड़ने वाले।”
ओवैसी, जो अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली और अल्पसंख्यक मुद्दों पर बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं, बिहार में इस बार बड़ी चुनावी तैयारी के संकेत दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब AIMIM को कमजोर समझने की भूल न की जाए। “हमने बिहार में अपने पैर जमा लिए हैं, अब वापसी का सवाल ही नहीं उठता,” उन्होंने कहा।
4 से 24: क्या AIMIM बढ़ाएगी अपना प्रभाव?
2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो कि उनके लिए एक बड़ा राजनीतिक ब्रेकथ्रू माना गया। हालांकि बाद में पार्टी के कुछ विधायक RJD में शामिल हो गए थे, जिससे AIMIM को झटका लगा।
अब ओवैसी फिर से सीमांचल को केंद्र में रखकर 2025 के चुनावों में उतरने की तैयारी कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि “इस बार मुकाबला एकतरफा नहीं होगा।”
वक्फ और मस्जिद मुद्दे पर सख्त तेवर
अपनी जनसभा में ओवैसी ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों और मस्जिदों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें वक्फ की जमीनें हड़प रही हैं और मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है।
“हम मस्जिद नहीं छोड़ेंगे। जो भी हमारी वक्फ की जमीनों पर नजर रखेगा, उसे कानूनी और जनतांत्रिक तरीके से जवाब मिलेगा,” – असदुद्दीन ओवैसी
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और मुस्लिमों के धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।
बिहार में मुस्लिम वोट और राजनीतिक समीकरण
बिहार में मुस्लिम वोट लगभग 16-17% हैं, जो सीमांचल जैसे क्षेत्रों में 30% से भी ज्यादा हैं। ओवैसी की रणनीति साफ है – वो RJD और कांग्रेस जैसी पुरानी सेक्युलर पार्टियों को चुनौती देते हुए सीधा मुस्लिम नेतृत्व पेश करने का दावा कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अगर AIMIM सीमांचल में एक बार फिर प्रदर्शन दोहराती है, तो यह महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है और BJP को अप्रत्यक्ष फायदा पहुंच सकता है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
RJD और कांग्रेस जैसी पार्टियां पहले ही ओवैसी पर “वोटकटवा” होने का आरोप लगाती रही हैं। वहीं, BJP इस विभाजन को लेकर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन जानकार मानते हैं कि AIMIM की सक्रियता सियासी गणित को प्रभावित जरूर कर सकती है।
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