अक्सर महिलाएं अपनी हड्डियों की सेहत को अनदेखा कर देती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे हड्डियों की मजबूती चुराती है और अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक कोई गंभीर फ्रैक्चर या चोट न हो। इस बीमारी को “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती लक्षण सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे नजर आते हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और नाजुक हो जाती हैं। हड्डियों की मात्रा (बोन डेंसिटी) धीरे-धीरे घटती है, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में यह समस्या मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलावों के कारण अधिक होती है।
महत्वपूर्ण लक्षण जो नजरअंदाज न करें:
कमर या पीठ में लगातार दर्द – यह शुरुआती संकेत हो सकता है कि रीढ़ की हड्डियां कमजोर हो रही हैं।
ऊंचाई में कमी या झुकना – अगर अचानक कंधे झुकने या ऊंचाई कम होने लगे, तो यह हड्डियों के पतले होने का संकेत हो सकता है।
हड्डियों में अधिक फ्रैक्चर – हल्की चोट या गिरने पर हड्डियों का टूटना ऑस्टियोपोरोसिस का गंभीर लक्षण है।
हाथ-पैरों में कमजोरी या झिनझिनाहट – हड्डियों और मांसपेशियों के कमजोर होने से यह समस्या शुरू हो सकती है।
मुड़ने या झुकने पर दर्द – सामान्य गतिविधियों जैसे झुकना या उठना दर्दनाक लगने लगे तो सावधानी बरतें।
कौन हैं जोखिम में:
मेनोपॉज के बाद की महिलाएं
धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले लोग
शारीरिक रूप से निष्क्रिय लोग
कैल्शियम और विटामिन D की कमी वाले लोग
बचाव और उपाय
कैल्शियम और विटामिन D युक्त आहार: दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां और सूरज की रोशनी।
नियमित व्यायाम: वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, जॉगिंग और योग हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
धूम्रपान और शराब से परहेज: ये हड्डियों की मजबूती घटाते हैं।
हड्डियों की जांच: 40 साल की उम्र के बाद बोन डेंसिटी टेस्ट कराना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्टियोपोरोसिस को समय पर पहचानना और रोकना बेहद जरूरी है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर फ्रैक्चर और जीवनशैली पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
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