महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास अघाड़ी (MVA) पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार झेलने के एक दिन बाद कांग्रेस ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में अकेले उतरने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने सभी 227 वार्डों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया, जिससे MVA के सहयोगी शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) में असंतोष की लहर दौड़ गई। शिवसेना (UBT) के मुखपत्र ‘सामना’ ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का यह फैसला ‘राष्ट्रीय पार्टी बनने की होड़’ है, लेकिन इसका अंजाम बिहार जैसा ही होगा – यानी पूर्ण विफलता। जनवरी 2026 में होने वाले BMC चुनाव, जो एशिया की सबसे अमीर नागरिक निकाय का चुनाव है, अब विपक्षी एकता के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।
कांग्रेस का यह ऐलान 15 नवंबर को मलाड में आयोजित ‘लक्ष्य 2026’ कैंप में किया गया, जहां महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख वरशा गायकवाड़ ने कहा, “पार्टी कार्यकर्ता अपनी ताकत पर BMC चुनाव लड़ना चाहते हैं। हम संविधान की तरह सबको साथ लेकर चलेंगे, लेकिन हिंसा और गरीबों पर अत्याचार करने वाली पार्टियों से दूरी बनाएंगे।” केंद्रीय महासचिव रामेश चेनिथला और प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल की मौजूदगी में यह बयान दिया गया। कांग्रेस का तर्क है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में शिवसेना (UBT) के दबाव में केवल दो लोकसभा सीटें (मुंबई उत्तर और उत्तर मध्य) और 10 विधानसभा सीटें मिलीं, जिससे कार्यकर्ताओं में असंतोष पनप गया। “हमने वर्सोवा, कुर्ला और बायकुल्ला जैसी पारंपरिक सीटें गंवा दीं। अब BMC में अपनी पहचान बनानी है,” एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा।
शिवसेना (UBT) ने कांग्रेस के फैसले को ‘स्वार्थी कदम’ बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा, “बिहार का फैसला देखा है ना? फिर भी अकेले लड़ना चाहते हो तो लड़ो, लेकिन हार की जिम्मेदारी खुद लो।” उद्धव ठाकरे ने 16 नवंबर को कहा, “कांग्रेस अपने फैसले ले सकती है, हम भी। लोकल बॉडी चुनाव में स्थानीय इकाइयों की राय का सम्मान करेंगे।” सामना के संपादकीय में लिखा गया, “कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी बनने की होड़ में MVA को कमजोर कर रही है। बिहार में गठबंधन के बावजूद हार मिली, अब BMC में अकेले उतरकर क्या साबित करेंगे?” शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि गठबंधन कार्यकर्ताओं को अवसर नहीं देता, लेकिन कांग्रेस का यह कदम MVA की एकता को चोट पहुंचा रहा है।
यह दरार उस समय आई है जब शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के बीच संभावित गठजोड़ की चर्चा चल रही है। कांग्रेस को MNS के साथ गठबंधन से परहेज है, क्योंकि राज ठाकरे के उत्तर भारतीय प्रवासियों के खिलाफ बयान पार्टी के वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। “MNS की विभाजनकारी राजनीति से हमारा उत्तर भारतीय वोटर भाजपा की ओर चला जाएगा,” एक कांग्रेसी नेता ने बताया। NCP (SP) ने भी चिंता जताई, लेकिन शरद पवार ने कहा, “हम बातचीत से समाधान निकालेंगे।” विपक्षी खेमे में यह फूट 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में MVA की हार के बाद और गहरी हो गई, जहां गठबंधन ने अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा।
भाजपा को इससे फायदा हो रहा है। महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) ने BMC पर कब्जा जमाने का लक्ष्य रखा है, जो 25 वर्षों से शिवसेना के कब्जे में रहा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “विपक्ष की फूट हमारी ताकत बनेगी। महाराष्ट्र मिशन 2025-29 के तहत हम विकास पर फोकस करेंगे।” BMC का बजट 74,247 करोड़ रुपये का है, जो सड़क, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य पर खर्च होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि MVA की यह दरार विपक्ष को और कमजोर करेगी, खासकर जब भाजपा अकेले या सहयोगियों के साथ मजबूत दिख रही है।
कांग्रेस का सोलो फैसला कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर रहा है, लेकिन MVA की एकता पर सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह बिहार हार का सबक है या स्थानीय महत्वाकांक्षा? उद्धव गुट की चेतावनी साफ है – अकेले लड़ो तो बिहार जैसी पटखनी तय। जनवरी 2026 का BMC चुनाव अब महाराष्ट्र की सियासत का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बनेगा, जहां गठबंधन की परीक्षा होगी।
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