‘ऑब्सेशन रोमांस नहीं है…’, राधिका आप्टे ने बॉलीवुड को दिया सीधा संदेश

बॉलीवुड अभिनेत्री राधिका आप्टे ने एक बार फिर चर्चा में आते हुए बड़े बयान दिए हैं, जिनमें उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि ऑब्सेशन (जुनून) और रोमांस (प्यार) में बहुत बड़ा फर्क होता है — और सिनेमा में अक्सर इसे गलत तरीके से पेश किया जाता है। अभिनेत्री ने कहा है कि जब ‘कंट्रोल’ और ‘शक्ति‑प्रदर्शन’ को प्रेम के रूप में दिखाया जाता है, तो वह न सिर्फ गलत है बल्कि समाज में भी भ्रम फैलाता है।

अपनी हालिया रिलीज़ फिल्म ‘साली मोहब्बत’ के संदर्भ में दिए गए इंटरव्यू में राधिका ने बताया कि फिल्म में उनके किरदार द्वारा उठाए गए कदम, जो उनकी बेवफाई का परिणाम हैं, उसे पैशनेट प्यार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यह व्यवहार लंबे समय से चले आ रहे अन्याय और दुर्व्यवहार के कारण होता है न कि किसी रोमांटिक जुनून के चलते।

उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति में अक्सर ऑब्सेशन को प्यार समझ लिया जाता है। लेकिन ऑब्सेशन कभी रोमांस नहीं होता। जब हमें किसी की खुशी के लिए लगातार अपनी खुशी से समझौता करना पड़ता है तो हम उसे प्यार नहीं कह सकते। मैं इस सोच से बिल्कुल भी सहमत नहीं हूं।”

राधिका ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी रिश्ते में नियंत्रण, जबरदस्ती या खुद की इच्छाओं को दूसरे पर थोपना प्रेम की परिभाषा में नहीं आता। चाहे वह पति हो, परिवार का दबाव हो या सामाजिक अपेक्षाएँ — केवल यही दिखाना कि आप किसी को नियंत्रित कर सकते हैं — प्रेम नहीं बल्कि सत्ता का खेल है।

उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म और मीडिया में ऐसी कहानियाँ दिखाना खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह दर्शकों को एक गलत सन्देश देता है। जब लोग फिल्मों में बार‑बार ऐसे रिश्तों को प्रेम के रूप में देखते हैं, तो उनकी सोच पर उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

राधिका अक्सर अपनी स्पष्ट विचारधारा और मजबूत सामाजिक दृष्टिकोण के लिए जानी जाती हैं। यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री पर समाज‑संबंधी मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी है। इससे पहले भी उन्होंने फिल्मों में दर्शाए जाने वाले सशक्त पात्रों, बॉडी इमेज, और परंपरागत सौंदर्य मानदंडों पर सवाल उठाए हैं।

‘साली मोहब्बत’ में राधिका का किरदार एक साधारण गृहिणी से एक शक्तिशाली और उग्र महिला की रूपांतरण यात्रा दिखाता है, जिसमें धोखे, मौन प्रतिशोध और भावनात्मक संघर्ष प्रमुख रूप से हैं। राधिका ने कहा कि इस तरह का चरित्र रोमांस की परिभाषा से कहीं अधिक जटिल और वास्तविक है और इसे सिर्फ जुनून से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयान बॉलीवुड में बड़ी सोच और बदलाव की दिशा में एक कदम हैं, जहाँ फिल्मों और कहानियों में स्वस्थ रिश्तों, सम्मानपूर्ण व्यवहार और वैयक्तिक सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता दी जा सके। …राधिका जैसे कलाकारों के ऐसे मत इस दिशा में दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं।

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