अब मोबाइल नहीं, कार और घड़ी से भी होगा UPI पेमेंट – RBI का बड़ा कदम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल पेमेंट क्षेत्र में एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) को मोबाइल के दायरे से बाहर लाने का ऐलान किया है। अब UPI पेमेंट सिर्फ स्मार्टफोन से नहीं, बल्कि स्मार्टवॉच, कार, वॉइस असिस्टेंट और अन्य इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेज़ के जरिए भी संभव होगा।

यह घोषणा RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद की। उन्होंने कहा कि यह पहल डिजिटल भुगतान को और अधिक सहज, सुलभ और सार्वभौमिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अब तकनीक बनेगी पेमेंट का हथियार

गवर्नर दास ने कहा कि RBI अब UPI इकोसिस्टम को “किसी भी डिवाइस से भुगतान” (UPI for any device) के मॉडल की ओर ले जाना चाहता है। इसका अर्थ यह है कि अब उपभोक्ता सिर्फ QR कोड स्कैन करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे अपनी कार में बैठे-बैठे टोल या पार्किंग चार्ज भर सकेंगे, स्मार्टवॉच से किराना का भुगतान कर सकेंगे या फिर वॉइस कमांड से बिल पेमेंट कर सकेंगे।

इसका लक्ष्य है UPI को एक truly ubiquitous प्लेटफॉर्म बनाना, जो हर रोज़ के उपकरणों में घुल-मिल जाए।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

RBI की योजना के अनुसार, पेमेंट टेक्नोलॉजी कंपनियों और बैंकों के सहयोग से ऐसे UPI-सक्षम डिवाइसेज़ तैयार किए जाएंगे जिनमें:

NFC (Near Field Communication)

Voice Recognition & Authentication

Biometric सेंसर

Car infotainment systems से एकीकरण
जैसी तकनीकों का उपयोग होगा।

यह फीचर खासतौर पर उन यूज़र्स के लिए फायदेमंद होगा जो बार-बार मोबाइल का उपयोग नहीं कर सकते या IoT आधारित ऑटोमेशन चाहते हैं।

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम

सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को यह घोषणा एक नई ऊर्जा देगी। गवर्नर दास ने कहा कि यह सुविधा उन क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देगी जहां अब तक इसका दायरा सीमित था – जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में पहनने योग्य डिवाइसेज़, कारों में ऑटो पेमेंट सिस्टम, वॉइस आधारित लेनदेन आदि।

RBI का कहना है कि इस सुविधा से डिजिटल लेनदेन की पहुंच और गति में काफी बढ़ोतरी होगी और भारत को कैशलेस इकॉनमी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

उपभोक्ताओं के लिए क्या फायदे?

मोबाइल की निर्भरता खत्म

तेज़ और सुविधाजनक भुगतान

UPI का नए उपकरणों से विस्तार

वॉइस और बायोमैट्रिक आधारित सिक्योर पेमेंट

तकनीकी रूप से पिछड़े इलाकों में भी डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा

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