अब स्कूलों में किताबें नहीं, हुनर की होगी पढ़ाई

प्रदेश में स्कूली शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित रखने की जगह अब उसे कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत शुरू किया गया है एक अनूठा कार्यक्रम — “करके सीखना” (Learning by Doing)।

कौशल आधारित पढ़ाई की नई पहल
“करके सीखना” कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब केवल पढ़ाया नहीं जा रहा, बल्कि उन्हें हाथों से काम करके सीखने का मौका भी दिया जा रहा है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए शुरू किया गया है।

बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ काष्ठ कला (Wood Work), धातु कार्य (Metal Work), ऊर्जा और पर्यावरण, कृषि-बागवानी, स्वास्थ्य और पोषण जैसे विषयों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

अब स्कूलों में अत्याधुनिक ‘लर्निंग बाय डूइंग’ लैब्स
पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य के 75 जिलों के 2274 स्कूलों में अत्याधुनिक लर्निंग बाय डूइंग लैब्स स्थापित की गई हैं। इन प्रयोगशालाओं में 205 प्रकार के उपकरण छात्रों के कौशल को विकसित करने के लिए उपलब्ध कराए गए हैं।

इससे पहले 15 जिलों के 60 स्कूलों में इस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था, जिसके नतीजे काफी उत्साहजनक रहे — बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।

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