अब महंगा पड़ेगा ऑनलाइन खाना मंगाना, Zomato-Swiggy पर बढ़ा टैक्स बोझ

ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वालों को अब ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) जैसी प्रमुख फूड डिलीवरी कंपनियों से खाना मंगाना अब पहले से महंगा हो सकता है। इसकी वजह बनी है हाल ही में हुई GST काउंसिल की बैठक, जिसमें ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं पर कर ढांचे में बदलाव को मंजूरी दी गई।

इस बदलाव के तहत अनुमान है कि Zomato और Swiggy को सालाना करीब ₹200 करोड़ का अतिरिक्त टैक्स बोझ उठाना पड़ेगा, जिसे वे अंततः ग्राहकों पर ही ट्रांसफर कर सकते हैं।

क्या है GST काउंसिल का फैसला?

GST काउंसिल की हालिया 53वीं बैठक में यह फैसला लिया गया कि ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स को अब रेस्टोरेंट की ओर से ली गई डिलीवरी फीस और अन्य चार्जेस पर भी GST अदा करना होगा। अभी तक यह कर सीधे रेस्टोरेंट के जिम्मे होता था, लेकिन अब Zomato और Swiggy खुद इन सेवाओं पर टैक्स जमा करेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्लेटफॉर्म्स की टैक्स देनदारी में बढ़ोतरी होगी और वे इस बढ़ते खर्च को खुद वहन करने के बजाय ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं।

ग्राहकों की जेब पर असर कैसे पड़ेगा?

वर्तमान में, जोमैटो या स्विगी पर ऑर्डर करने पर ग्राहकों को:

खाद्य मूल्य (Food Cost)

डिलीवरी शुल्क

प्लेटफॉर्म शुल्क (Platform Fee)

GST (5% तक)

अदा करना होता है। अब डिलीवरी शुल्क और अन्य सेवा शुल्क पर भी अगर अतिरिक्त GST लगेगा, तो हर ऑर्डर पर 10-15 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।

हालांकि यह राशि प्रतीत में छोटी हो सकती है, लेकिन महिने में कई बार ऑर्डर करने वालों के लिए यह खर्च बड़ी रकम में बदल सकता है।

Zomato और Swiggy ने क्या कहा?

अब तक इन कंपनियों ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन उद्योग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि यह टैक्स परिवर्तन लॉजिस्टिक लागत को प्रभावित करेगा और कंपनियों को अपनी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव करना पड़ेगा।

विशेषज्ञों की राय

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि प्लेटफॉर्म पर हो रहे लेन-देन का सटीक टैक्स ऑडिट किया जा सके।

वहीं, उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो नियमित रूप से ऑनलाइन फूड ऑर्डर करते हैं।

क्या बदलने वाला है आगे?

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स अपने चार्जेस में वृद्धि कर सकते हैं

ग्राहकों को हर ऑर्डर पर ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है

रेस्टोरेंट्स और ग्राहकों के बीच सीधी डिलीवरी एक बार फिर आकर्षक विकल्प बन सकती है

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