भारतीय सेना ने अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब भर्ती में आंखों की स्कैनिंग (Iris Scan) तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों की पहचान शत-प्रतिशत सुनिश्चित हो सकेगी। यह नई व्यवस्था सबसे पहले बिहार के मुजफ्फरपुर के चक्कर मैदान में अगस्त में होने वाली अग्निवीर भर्ती में लागू होगी।
🤔 पहले कैसे होता था फर्जीवाड़ा?
सैन्य अधिकारियों के अनुसार, पहले कुछ मामलों में यह देखने को मिला कि दौड़ में कोई और उम्मीदवार भाग लेता था और मेडिकल जांच के वक्त मूल अभ्यर्थी खुद को पेश कर देता था। इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते थे।
🆕 नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?
शारीरिक दक्षता परीक्षण और अन्य प्रारंभिक चरणों के बाद मेडिकल टेस्ट से पहले सभी अभ्यर्थियों की आइरिस स्कैनिंग की जाएगी।
इस स्कैनिंग से डिजिटल पहचान डेटा तैयार होगा, जिससे किसी भी तरह के पहचान फर्जीवाड़े को रोका जा सकेगा।
बायोमेट्रिक सिस्टम भी पहले की तरह जारी रहेगा, जिससे डुअल वेरिफिकेशन संभव होगा।
यह तकनीकी व्यवस्था ‘जीरो फर्जीवाड़ा’ लक्ष्य को पाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
📍 किन जिलों के युवा होंगे शामिल?
मुजफ्फरपुर की अग्निवीर भर्ती में इन जिलों के अभ्यर्थी भाग लेंगे:
मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर, पूर्वी और पश्चिम चंपारण।
📅 परीक्षा कब होगी?
ऑनलाइन लिखित परीक्षा की तिथि घोषित की जा चुकी है।
परीक्षा का आयोजन 30 जून से 10 जुलाई के बीच किया जाएगा।
अग्निवीर जीडी (जनरल ड्यूटी) श्रेणी की परीक्षाएं 30 जून से 3 जुलाई तक चलेंगी।
एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं।
विस्तृत जानकारी के लिए उम्मीदवार भारतीय सेना की वेबसाइट पर विजिट करें: joinindianarmy.nic.in
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