दुनिया में मोबाइल नेटवर्क के विस्तार के बाद अब इंसान चांद पर भी इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेगा! टेक्नोलॉजी की दुनिया में नोकिया ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है और वह चंद्रमा पर 4G LTE नेटवर्क स्थापित करने वाली पहली कंपनी बन गई है। यह नेटवर्क NASA के इंटुइटिव मशीन्स IM-2 मिशन के तहत इस्तेमाल किया जाएगा।
चंद्रमा पर 4G क्यों जरूरी है?
NASA का आर्टेमिस प्रोग्राम 2028 तक फिर से अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने और 2030 के दशक तक वहां एक स्थायी बेस स्थापित करने की योजना बना रहा है। ऐसे में एक मजबूत और स्थिर संचार प्रणाली की जरूरत है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों और वैज्ञानिक मिशनों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। नोकिया का यह 4G नेटवर्क भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए नींव रखने का काम करेगा।
कैसे काम करेगा चांद पर 4G नेटवर्क?
📡 इंट्यूटिव मशीन एथेना लैंडर के जरिए – यह लैंडर 26 फरवरी 2025 को लॉन्च हुआ और 6 मार्च 2025 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा।
🔗 नेटवर्क इंटरफेस बॉक्स (NIB) का उपयोग – यह चंद्रमा की कठिन परिस्थितियों को सहने के लिए डिज़ाइन किया गया है और सिग्नल को स्थिर बनाए रखेगा।
🚀 MAPP रोवर और माइक्रो नोवा हॉपर ड्रोन से कनेक्टिविटी – इससे चंद्रमा पर सतत नेटवर्क कवरेज बना रहेगा।
भविष्य के मिशनों के लिए मील का पत्थर
नोकिया का 4G नेटवर्क आने वाले चंद्र मिशनों के लिए नींव रखेगा। कंपनी भविष्य में 4G/5G टेक्नोलॉजी को Axiom स्पेससूट में शामिल करने की योजना बना रही है। इससे चंद्रमा पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री बिना किसी रुकावट के संचार कर सकेंगे।
चंद्रमा से आगे, सितारों तक!
यह ऐतिहासिक उपलब्धि सिर्फ चंद्रमा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य ग्रहों और सितारों तक संचार प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। आने वाले समय में यह तकनीक अंतरिक्ष में इंसानी बस्तियां बसाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
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