देश में टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। संसद की एक समिति ने नए इनकम टैक्स बिल, 2025 पर रिपोर्ट लोकसभा में पेश की है, जिसमें 64 साल पुराने आयकर कानून को बदलने के लिए 566 महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों से टैक्सपेयर्स को न केवल जुर्माने से राहत मिलेगी, बल्कि रिफंड को लेकर भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।
ITR फाइल नहीं करने पर भी मिल सकता है रिफंड
समिति का प्रमुख सुझाव यह है कि अगर कोई व्यक्ति समय पर ITR फाइल नहीं कर पाता, तो उसे रिफंड से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही समिति का मानना है कि लोगों को सिर्फ जुर्माने से बचने के लिए ITR फाइल करने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।
छोटे टैक्सपेयर्स—जिनकी आय टैक्स योग्य नहीं है लेकिन जिनका TDS कटा है, उन्हें ITR फाइल किए बिना भी रिफंड क्लेम करने की छूट दी जानी चाहिए। समिति ने यह भी सिफारिश की है कि आईटीआर की अंतिम तिथि गुजरने के बाद भी TDS रिफंड क्लेम किया जा सके, और इसके लिए जुर्माना न लगे।
प्रॉपर्टी मालिकों को मिलेगा स्टैंडर्ड डिडक्शन में लाभ
समिति ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को लेकर सुझाव दिया है कि इसे 30% तक किया जाए, जो कि संपत्ति के वार्षिक मूल्य पर म्यूनिसिपल टैक्स कटने के बाद लागू हो। साथ ही कंस्ट्रक्शन से पहले के ब्याज पर मिलने वाला डिडक्शन अब केवल लेट-आउट नहीं, बल्कि सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टीज पर भी लागू हो सकता है।
अन्य महत्वपूर्ण सिफारिशें
एडवांस रूलिंग फीस, PF पर TDS, कम टैक्स सर्टिफिकेट और पेनल्टी पॉवर्स में बदलाव।
MSME की परिभाषा को MSME एक्ट के अनुरूप करने का सुझाव।
गैर-लाभकारी संगठनों के लिए ‘इनकम बनाम रिसीट्स’, ‘गुमनाम दान’ और ‘डीम्ड एप्लीकेशन’ जैसे शब्दों को स्पष्ट करने की जरूरत।
धार्मिक और चैरिटेबल ट्रस्टों को गुमनाम दान पर टैक्स छूट जारी रखने की सलाह।
क्या होगा फायदा?
नया इनकम टैक्स बिल पुराने और जटिल नियमों को हटाकर आसान भाषा और सरल ढांचे में टैक्स कानून लाने की कोशिश है। 13 फरवरी 2025 को संसद में पेश किए गए इस बिल का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को 21वीं सदी के लिए उपयुक्त बनाना है।
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