26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद अब अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय दिलाने के भारत के प्रयासों का अमेरिका शुरू से समर्थन करता आया है। उन्होंने साफ कहा कि राणा को भारत प्रत्यर्पित किया गया है ताकि वह न्याय का सामना कर सके।
🧾 क्या कहा अमेरिका ने?
अमेरिकी बयान में एक अहम खुलासा हुआ है — मुंबई हमले के बाद तहव्वुर राणा ने डेविड हेडली से कहा था, “भारतीय इसके हकदार थे।”
एक इंटरसेप्टेड कॉल में, राणा ने 9 मारे गए लश्कर आतंकियों की सराहना की और यहां तक कहा कि उन्हें पाकिस्तान का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार ‘निशान-ए-हैदर’ दिया जाना चाहिए। यह अवॉर्ड शहीद सैनिकों के लिए आरक्षित होता है।
🕵️♂️ अब कहां है तहव्वुर राणा?
राणा इस वक्त एनआईए की कस्टडी में है, जहां उससे 18 दिन तक पूछताछ की जाएगी।
उसके भारत प्रत्यर्पण में अमेरिकी एजेंसियों और एनआईए की बड़ी भूमिका रही है।
उसे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर लाकर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे एनआईए मुख्यालय के सुरक्षित कस्टडी रूम में भेजा गया।
⚖️ राणा का वकील कौन है?
राणा की तरफ से केस वकील पीयूष सचदेवा लड़ रहे हैं, जिन्हें दिल्ली लीगल सेल ने नियुक्त किया है।
कोर्ट ने 18 दिन की हिरासत मंजूर की है, जबकि एनआईए ने 20 दिन की मांग की थी।
सचदेवा का कहना है कि अगर एजेंसी को और समय चाहिए, तो उन्हें दोबारा अर्जी देनी होगी।
⛓️ अब तक का पूरा मामला संक्षेप में:
2008: मुंबई आतंकी हमले के बाद तहव्वुर राणा का नाम सामने आया।
2009: उसे अमेरिका में गिरफ्तार किया गया।
2011: अमेरिका की अदालत ने डेनमार्क साजिश मामले में दोषी ठहराया, लेकिन मुंबई हमलों में बरी कर दिया।
14 साल की सजा मिली, जिससे बाद भारत ने प्रत्यर्पण की मांग शुरू की।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब उसे भारत लाया गया है।
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