गठबंधन धर्म निभा रहे मुकेश सहनी, सीटों को लेकर नहीं रखी कोई मांग

बिहार की सियासत में सीट बंटवारे को लेकर अक्सर तकरार देखने को मिलती है, लेकिन इस बार विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने चौंकाते हुए बेहद नरम रुख अपना लिया है। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए जब सभी दल अपने-अपने हिस्से की सीटें बढ़ाने की होड़ में लगे हैं, तब सहनी ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि “मेरी कोई डिमांड नहीं है, गठबंधन जो तय करेगा, मैं उसी पर चुनाव लड़ूंगा।”

उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में समझदारी और रणनीति दोनों के रूप में देखा जा रहा है। यह भी संकेत माना जा रहा है कि सहनी किसी बड़े राजनीतिक मकसद की दिशा में चुपचाप आगे बढ़ रहे हैं।

गठबंधन धर्म की मिसाल

मुकेश सहनी इस समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा हैं और बिहार में भाजपा-जेडीयू के साथ मिलकर चुनावी समर में उतरने की तैयारी में हैं। सीट बंटवारे को लेकर पूछे गए सवाल पर सहनी ने साफ कहा,
“मेरी कोई व्यक्तिगत मांग नहीं है। गठबंधन में जो निर्णय होगा, वह मुझे मंजूर है। मैं कम सीटों पर भी चुनाव लड़ने को तैयार हूं।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार के कई छोटे दल अपने लिए बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। सहनी की यह राजनीतिक नरमी उन्हें गठबंधन के भीतर भरोसेमंद चेहरा बना सकती है।

पिछली बार हुए थे नाराज

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान सहनी की नाराजगी खुलकर सामने आई थी। उस समय उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी पर एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाया था। लेकिन अब बदले हालात में उनका लहजा और रुख पूरी तरह बदला हुआ है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सहनी अब टकराव की राजनीति से अलग, एक लंबी पारी खेलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। छोटे दलों के लिए गठबंधन के भीतर बने रहकर अपनी हैसियत को बनाए रखना एक चैलेंज होता है, और सहनी इस चुनौती को समझदारी से हैंडल कर रहे हैं।

निषाद वोट बैंक पर नजर

मुकेश सहनी का राजनीतिक आधार बिहार का निषाद समुदाय है, जो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकता है। सहनी की यह रणनीति हो सकती है कि गठबंधन में रहते हुए अपने जनाधार को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में मोलभाव की स्थिति में उनकी आवाज और असर दोनों बड़े।

बीजेपी के लिए राहत

सहनी के इस बयान को NDA, विशेषकर भाजपा के लिए एक राहत के तौर पर देखा जा रहा है। सीट शेयरिंग को लेकर जहां अन्य सहयोगी दलों से खींचतान बनी हुई है, वहीं सहनी का सहयोगी रवैया भाजपा को रणनीतिक रूप से मजबूती देगा।

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