बांग्लादेश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और उच्च विकास दर को ‘नकली’ करार दिया है। यूनुस ने दावा किया कि 15 सालों के सत्ता काल में जिस तेजी से बांग्लादेश ने विकास किया, वह सिर्फ दिखावा था।
दुनिया पर लगाया जिम्मेदारी का आरोप
स्विस अल्पाइन रिसॉर्ट में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक के दौरान यूनुस ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा:
“हमारी विकास दर नकली है। पूरी दुनिया इस दिखावे को संभव बनाने के लिए जिम्मेदार है।”
यूनुस ने यह भी आरोप लगाया कि शेख हसीना ने दावोस में दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की कि वह देश को कुशलता से चला रही हैं, जबकि किसी ने उनके दावों पर सवाल नहीं उठाए।
शेख हसीना की सत्ता में अर्थव्यवस्था की कायापलट
शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था ने रिकॉर्ड तोड़ प्रगति की।
2009: जब हसीना ने सत्ता संभाली, तब देश की वृद्धि दर सिर्फ 5% थी।
2017/18: यह दर बढ़कर लगभग 8% हो गई, जो बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
2023: विश्व बैंक ने बांग्लादेश को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक करार दिया।
हालांकि, कोविड-19 और यूक्रेन युद्ध के कारण विकास दर पर असर पड़ा, लेकिन बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की सराहना वैश्विक मंचों पर की गई।
यूनुस के आरोपों के पीछे क्या है?
मोहम्मद यूनुस ने यह आरोप बिना किसी ठोस आंकड़े या तर्क के लगाए, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या यह व्यक्तिगत खीझ का नतीजा है। यूनुस को बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में अब तक सफलता नहीं मिली है, और आलोचकों का मानना है कि यही वजह हो सकती है कि उन्होंने हसीना सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठाए हैं।
हसीना पर आलोचनाओं के बावजूद मिली वैश्विक प्रशंसा
शेख हसीना को उनके कार्यकाल के दौरान बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग और आर्थिक प्रगति का श्रेय दिया जाता है। हालांकि, मानवाधिकारों के उल्लंघन और असहमति को दबाने के आरोप भी उनके खिलाफ लगे हैं।
निष्कर्ष
शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश ने वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। यूनुस के आरोपों ने इस उपलब्धि पर बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या यह आरोप हसीना सरकार के मॉडल को बदनाम करने की कोशिश है, या इसके पीछे कोई वास्तविक सच्चाई छिपी है।
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