क्या आप दिन भर में कई घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिताते हैं? सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, गेम खेलना, ई-बुक पढ़ना या ऑनलाइन मीटिंग्स में रहना — ये आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस आदत का सबसे ज्यादा असर आपकी आंखों पर पड़ रहा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक मोबाइल या किसी भी डिजिटल स्क्रीन को लगातार देखना आंखों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह सिर्फ नजर कमजोर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि आंखों में जलन, ड्राईनेस और नींद संबंधी समस्याओं तक पहुंच सकता है।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
“मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) आंखों की रेटिना पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है। यह प्रकाश नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित करता है और आंखों की थकान को बढ़ाता है।”
आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव
1. डिजिटल आई स्ट्रेन (Digital Eye Strain)
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, भारीपन, धुंधलापन और जलन जैसी शिकायतें सामने आती हैं। इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम या डिजिटल आई स्ट्रेन भी कहा जाता है।
2. ड्राई आई सिंड्रोम (Dry Eye Syndrome)
मोबाइल देखते समय हम सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों की नमी कम हो जाती है और सूखापन, चुभन या लालिमा हो सकती है।
3. नजर कमजोर होना (Myopia)
बच्चों और किशोरों में अत्यधिक मोबाइल उपयोग से निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) तेजी से बढ़ रहा है। कम उम्र में चश्मा लगने की समस्या बढ़ रही है।
4. नींद में बाधा (Sleep Disruption)
रात में मोबाइल चलाने से नीली रोशनी नींद लाने वाले हार्मोन को दबा देती है, जिससे अनिद्रा और थकान की समस्या हो सकती है।
5. सिरदर्द और चक्कर आना
लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर फोकस करने से आंखों और दिमाग पर दबाव बढ़ता है, जिससे सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्या हो सकती है।
क्या हैं बचाव के उपाय?
20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट पर 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें।
स्क्रीन ब्राइटनेस घटाएं और नाइट मोड का उपयोग करें।
ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे या ऐप का उपयोग करें।
आंखों की नमी बनाए रखने के लिए पलकें नियमित रूप से झपकाएं और जरूरत पड़ने पर आई ड्रॉप्स का प्रयोग करें।
सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल का उपयोग बंद करें।
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