सर्दियों में बाजार में कच्ची हल्दी खूब मिलती है। दिखने में ये बिल्कुल अदरक जैसी होती है, लेकिन रंग पीला होता है। कच्ची हल्दी को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है, लेकिन कच्ची हल्दी अपने आप में सूखी हल्दी से कहीं ज्यादा फायदेमंद होती है। खासकर जो लोग गठिया, जोड़ों के दर्द या हाई यूरिक एसिड की समस्या से परेशान हैं, उन्हें कच्ची हल्दी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।
कच्ची हल्दी और यूरिक एसिड का कनेक्शन
कच्ची हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन नामक तत्व यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में बहुत मददगार होता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबायोटिक गुण जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करते हैं। हल्दी का नियमित सेवन अर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी घटाता है।
कच्ची हल्दी का सेवन कैसे करें?
सब्जियों में कच्ची हल्दी कसकर डालें, इससे खाना ज्यादा पौष्टिक और फायदेमंद बनता है।
कच्ची हल्दी को दूध में डालकर उबाल लें और यह हल्दी वाला दूध पीएं। यह शरीर को कई तरह से स्वस्थ रखता है।
1 गिलास पानी में कच्ची हल्दी कसकर डालकर उबालें और पीएं, यह दर्द और सूजन में राहत देगा।
कच्ची हल्दी के और फायदे
सूखी हल्दी की बजाय कच्ची हल्दी का इस्तेमाल सर्दियों में ज्यादा लाभकारी है।
सर्दी-जुकाम और खांसी में भी कच्ची हल्दी बहुत कारगर होती है।
यह आपकी इम्यूनिटी को मजबूत बनाती है, पाचन को दुरुस्त करती है और स्किन के लिए भी लाभदायक है।
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