पाकिस्तान की टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा झटका!
माइक्रोसॉफ्ट ने 25 साल बाद अब पाकिस्तान में लगभग अपना पूरा ऑपरेशन बंद कर दिया है।
देशभर में कंपनी के ऑफिस बंद हो चुके हैं, सिर्फ एक ऑफिस बचा है जहां 5 कर्मचारी कार्यरत हैं।
यह कदम सिर्फ एक कॉर्पोरेट फैसला नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक और आर्थिक हालात का आईना भी माना जा रहा है।
📌 कब और कैसे शुरू हुआ था माइक्रोसॉफ्ट का पाकिस्तान सफर?
साल 1999 में माइक्रोसॉफ्ट ने पाकिस्तान में कदम रखा था।
इस पहल के पीछे जव्वाद रहमान का अहम योगदान था, जिन्हें माइक्रोसॉफ्ट पाकिस्तान का फाउंडर माना जाता है।
LinkedIn पर उन्होंने एक इमोशनल पोस्ट में लिखा – “एक युग समाप्त हो गया।”
🔍 माइक्रोसॉफ्ट के जाने से क्या असर होगा?
सरकारी और निजी आईटी सेक्टर में गहरा असर
एजुकेशन सेक्टर को झटका, जहां माइक्रोसॉफ्ट टूल्स का खूब इस्तेमाल होता था
स्टार्टअप्स और डेवेलपर्स को विकल्प खोजना होगा
रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रस्ट पर सीधा असर
💡 अब पाकिस्तान के पास क्या विकल्प हैं?
Google Workspace (Docs, Sheets, Gmail आदि) का अधिक उपयोग
LibreOffice और OpenOffice जैसे फ्री टूल्स का सहारा
Ubuntu, Linux Mint जैसे ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम्स का उपयोग
चीन की Huawei Cloud, Alibaba Cloud, Tencent Cloud जैसी सर्विसेस पर निर्भरता बढ़ सकती है
AI और क्लाउड सर्विसेस के लिए नए पार्टनर तलाशने होंगे
🌐 माइक्रोसॉफ्ट का वैश्विक प्रभुत्व
माइक्रोसॉफ्ट आज भी 190 से अधिक देशों में ऑपरेट कर रही है।
विंडोज, ऑफिस, Azure क्लाउड, AI और साइबर सिक्योरिटी में यह एक ग्लोबल लीडर है।
ऐसे में किसी देश से उसका बाहर निकलना एक अलार्मिंग सिग्नल है।
📣 क्या बची है कोई उम्मीद?
जव्वाद रहमान ने पाकिस्तान सरकार और आईटी मंत्रालय से अपील की है कि वे माइक्रोसॉफ्ट के इंटरनेशनल हेडक्वार्टर से बात करें।
उम्मीद की जा रही है कि बातचीत से कोई समाधान निकल सके और माइक्रोसॉफ्ट की उपस्थिति देश में बनी रह सके।
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