प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोलकाता को तीन नई मेट्रो परियोजनाओं की सौगात देने के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गैरमौजूदगी एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। इस मुद्दे पर बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस पर सीधा कटाक्ष करते हुए कहा,
“ममता बनर्जी आएं या न आएं, मेट्रो तो चलती रहेगी।”
उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि राज्य सरकार की राजनीतिक दूरी के बावजूद केंद्र सरकार अपने विकास कार्यों को आगे बढ़ाती रहेगी।
क्या था मामला?
कोलकाता में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तीन मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जिनमें न्यू अलीपुर, जोका और हावड़ा जैसे प्रमुख रूट शामिल हैं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसमें शिरकत नहीं की।
राज्य सरकार की ओर से इस कार्यक्रम में कोई प्रमुख प्रतिनिधित्व नहीं होने को लेकर सियासी गलियारों में हलचल है।
बीजेपी का सीधा हमला
रवनीत सिंह बिट्टू ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“केंद्र सरकार की योजनाएं जनता के लिए होती हैं, किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के लिए नहीं। सीएम का आना-न आना उनके राजनीतिक निर्णय हो सकते हैं, लेकिन उससे योजनाओं की दिशा और गति प्रभावित नहीं होती।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि,
“पश्चिम बंगाल की जनता को मेट्रो की जरूरत है, न कि राजनीतिक टकराव की। प्रधानमंत्री जब विकास की बात करते हैं, तो उसमें सभी राज्यों को बराबर की हिस्सेदारी दी जाती है।”
टीएमसी ने क्या कहा?
हालांकि टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) की ओर से इस बयान पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के करीबी सूत्रों ने कहा है कि राज्य सरकार को उद्घाटन कार्यक्रम के समुचित सम्मानजनक आमंत्रण की कमी महसूस हुई, जिस कारण मुख्यमंत्री ने दूरी बनाए रखी।
विपक्ष ने क्या रुख अपनाया?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति और केंद्रीय मंत्रियों की बयानबाज़ी केंद्र-राज्य के तनावपूर्ण संबंधों को उजागर करती है। आने वाले चुनावी मौसम में इस तरह की बयानबाज़ी और बढ़ सकती है।
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