राजस्थान विधानसभा में भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द कर दी गई है। वे बारां जिले की अंता सीट से विधायक थे। यह फैसला विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राज्य महाधिवक्ता की रिपोर्ट के आधार पर लिया।
कांग्रेस ने इस फैसले का श्रेय खुद को देते हुए दावा किया है कि पार्टी के दबाव और कानूनी कार्रवाई के चलते भाजपा को यह निर्णय लेना पड़ा।
❗ क्या हैं आरोप?
कंवरलाल मीणा पर आरोप था कि उन्होंने:
सरकारी काम में बाधा डाली,
अधिकारियों को धमकाया,
और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
इस मामले में स्थानीय अदालत ने 14 दिसंबर 2020 को उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। वे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन राहत नहीं मिली। ट्रायल कोर्ट ने 21 मई 2025 तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
🎯 कांग्रेस का दावा — “हमारी कोशिश से हुआ ये फैसला”
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“कांग्रेस पार्टी के दबाव और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली द्वारा हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की अर्जी दायर करने के बाद ही भाजपा विधायक की सदस्यता रद्द करनी पड़ी।”
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी ट्वीट किया:
“सत्यमेव जयते… यह संविधान और लोकतंत्र की मर्यादा की जीत है।”
🧾 विधानसभा अध्यक्ष का पक्ष — “निष्पक्ष निर्णय लिया”
वासुदेव देवनानी ने कहा कि निर्णय पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया:
“संविधान के अनुच्छेद 177 के तहत महाधिवक्ता की राय ली गई। इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिया गया।”
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया था कि भाजपा ने कोर्ट का आदेश मिलने के बावजूद 23 दिन देरी से फैसला लिया।
🔍 क्या था पूरा मामला?
यह घटना साल 2005 की है। दांगीपुरी (राजगढ़) में उपसरपंच चुनाव के बाद दोबारा मतदान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने रास्ता जाम कर दिया था।
घटनास्थल पर पहुंचे तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता को विधायक कंवरलाल मीणा ने कथित तौर पर पिस्तौल दिखाकर धमकी दी थी।
इस गंभीर मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए 2020 में कोर्ट ने सजा सुनाई थी।
🧮 अब विधानसभा में कितने सदस्य?
कंवरलाल मीणा की बर्खास्तगी के बाद राजस्थान विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या 200 से घटकर 199 रह गई है।
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