उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई लगातार जारी है, और इस पर अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने योगी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार को सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और किसी एक समुदाय के साथ सौतेला रवैया अपनाना न्यायसंगत नहीं है।
मायावती ने क्या कहा?
मायावती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों को समान सम्मान मिलना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारों को बिना भेदभाव सभी धर्मों के अनुयायियों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, लेकिन अब मुसलमानों के साथ धार्मिक मामलों में जो सौतेला रवैया अपनाया जा रहा है, वह न्यायसंगत नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “सभी धर्मों के पर्व-त्योहारों से जुड़ी पाबंदियों और छूट के नियम-कानून सभी पर एक समान लागू होने चाहिए। लेकिन ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है, जिससे समाज में शांति और आपसी सौहार्द बिगड़ सकता है, जो बेहद चिंताजनक है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।”
यूपी में ऑपरेशन लाउडस्पीकर जारी
उत्तर प्रदेश सरकार ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बैन करने के अभियान में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद राज्य भर में मस्जिदों, मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए यह कदम जरूरी है, और इसके लिए पहले से ही गाइडलाइंस जारी की गई थीं। पुलिस प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि अगर कोई दोबारा अवैध रूप से लाउडस्पीकर लगाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या मायावती का बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा सुप्रीमो का यह बयान आगामी चुनावों से जुड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मायावती हाल ही में पार्टी में बड़े फैसले ले रही हैं, जिसमें अपने भतीजे आकाश आनंद को सभी पदों से हटाना और पार्टी से निष्कासित करना शामिल है। ऐसे में, लाउडस्पीकर विवाद पर उनका यह बयान मुस्लिम मतदाताओं को साधने की रणनीति भी हो सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि योगी सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी मंच पर और बड़ा बनाता है या नहीं।
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