2008 मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष एनआईए कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सबूतों की कमी, जांच में खामियां और UAPA की मंजूरी में त्रुटियां इस फैसले की मुख्य वजह रहीं।
एनआईए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में UAPA लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि नियमों के अनुसार मंज़ूरी नहीं ली गई थी। मामले में UAPA के दोनों मंज़ूरी आदेश दोषपूर्ण हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के घर में विस्फोटक रखने या संयोजन का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
पंचनामा करते समय जांच अधिकारी द्वारा घटनास्थल का कोई स्केच नहीं बनाया गया था। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट, डंप डेटा या कुछ भी एकत्र नहीं किया गया था। नमूने दूषित थे, इसलिए रिपोर्ट निर्णायक नहीं हो सकती और विश्वसनीय नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि विस्फोट में इस्तेमाल बाइक का चेसिस नंबर अस्पष्ट था और अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि विस्फोट से ठीक पहले यह साध्वी प्रज्ञा के कब्जे में थी।
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