उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में बड़े बदलाव: ड्राफ्ट लिस्ट से 2.89 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित कर दी गई है, जिसमें करीब 2.89 करोड़ से अधिक नामों को मतदाता सूची से हटाया गया है। यह संख्या राज्य में पहले से दर्ज कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं का लगभग 18.7 प्रतिशत बनाती है, जिससे यह संशोधन प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है।

निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नेवदीप रिनवा के निर्देशानुसार प्रकाशित ड्राफ्ट लिस्ट में अब तक की गई SIR प्रक्रिया का विस्तृत अपडेट शामिल है। इसमें विभिन्न कारणों के चलते नाम हटाए गए — जिनमें स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट होना, मृत्यु, डुप्लीकेट एंट्री, या अनमैप्ड मतदाता की श्रेणी शामिल है।

आंकड़ों के अनुसार हटाए गए नामों में से लगभग 1.26 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो अब उस विधानसभा क्षेत्र में नहीं रहते, जबकि लगभग 46 लाख मृत घोषित मतदाता, 23.7 लाख डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ, और करोड़ों अन्य ऐसे मतदाता हैं जो अनमैप्ड (uncollectable) श्रेणी में आए हैं।

राज्य के लखनऊ और प्रयागराज सहित गाजियाबाद, कानपुर नगर, मेरठ और आगरा जैसे प्रमुख जिलों में सबसे अधिक नाम काटे जाने की प्रवृत्ति देखी गई है। गाजियाबाद में लगभग 36.67 प्रतिशत, लखनऊ में 30.88 प्रतिशत, तथा प्रयागराज में 25.31 प्रतिशत नामों को सूची से बाहर किया गया है, जो शहरी क्षेत्रों में SIR प्रभाव की गहनता को दर्शाते हैं।

ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के साथ ही “दावे और आपत्तियाँ” (Claims and Objections) की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जो 6 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें Form 6 या Form 7 के माध्यम से पुनः नाम शामिल कराने या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

मतदाता सूची में नाम न होने की स्थिति में आयोग ने नागरिकों को निर्देश दिया है कि वे ईसीआई की वेबसाइट (eci.gov.in), CEO उत्तर प्रदेश पोर्टल, या अपने स्थानीय बूथ‑लेवल अधिकारी (BLO) से संपर्क करके अपने विवरणों की जांच कर सकते हैं। अगर किसी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया है, तो आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावों और आपत्तियों के तहत सुधार किया जा सकता है।

राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रक्रिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी पार्टियाँ कह रही हैं कि बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से कई वास्तविक मतदाता अनजाने में सूची से बाहर हो सकते हैं, जबकि निर्वाचन आयोग का मानना है कि यह कदम मतदाता सूची को त्रुटिहीन और अद्यतन बनाने की दिशा में आवश्यक है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस ड्राफ्ट सूची को अंतिम मतदाता सूची में बदलने से पहले दावों और आपत्तियों की जांच की जाएगी, जिसके पश्चात 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Rolls) जारी की जाएगी।

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