AI की वजह से गई नौकरी? अब सरकार देगी हर महीने पैसे – जानिए क्या है UBI सिस्टम

तकनीक ने जिस रफ़्तार से दुनिया को बदला है, उसी तेजी से नौकरियों की दुनिया भी बदल रही है। आज Artificial Intelligence (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग ने लाखों लोगों की रोज़ी-रोटी पर असर डाला है। मशीनें अब लेखन, डिज़ाइन, कोडिंग और ग्राहक सेवा जैसे काम भी इंसानों से तेज़ और सटीक करने लगी हैं। ऐसे में सवाल उठता है — जब इंसानों की नौकरियां मशीनें कर लेंगी, तो लोगों के पास आय का स्रोत क्या बचेगा?

इसी सवाल का संभावित जवाब बनकर उभर रहा है एक नया विचार — UBI यानी यूनिवर्सल बेसिक इनकम।

क्या है यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI)?

UBI एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था है जिसमें सरकार प्रत्येक नागरिक को नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि देती है — चाहे वह व्यक्ति काम करता हो या नहीं। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतें जैसे भोजन, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा पूरी हो सकें।

इस प्रणाली में आय “सार्वभौमिक” होती है — यानी सभी को मिलती है, और “बेसिक” होती है — यानी जीवन की न्यूनतम ज़रूरतों को पूरा करने लायक।

क्यों बढ़ रही है इसकी चर्चा

AI और रोबोटिक्स के दौर में मशीनें उत्पादन से लेकर सेवाओं तक हर क्षेत्र में इंसानों की जगह ले रही हैं। कई बड़ी कंपनियों ने लागत घटाने के लिए स्वचालन (Automation) को अपनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 10 वर्षों में लगभग 30% नौकरियाँ ऑटोमेशन से प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि UBI जैसी योजनाएँ भविष्य में आर्थिक असमानता को संतुलित कर सकती हैं।

अमेरिका, कनाडा, फिनलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में UBI पर पायलट प्रोजेक्ट्स चलाए जा चुके हैं। भारत में भी नीति आयोग ने 2017 की एक रिपोर्ट में इसे “संभावित विकल्प” बताया था।

UBI के फायदे

आर्थिक सुरक्षा:
हर नागरिक को न्यूनतम आमदनी की गारंटी मिलने से गरीबी और बेरोजगारी में कमी आ सकती है।

सामाजिक स्थिरता:
जब हर व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतें पूरी होंगी, तो समाज में असंतोष और अपराध दर घट सकती है।

नवाचार को प्रोत्साहन:
लोग जोखिम उठाने से नहीं डरेंगे, क्योंकि उन्हें यह भरोसा रहेगा कि जीवन की न्यूनतम ज़रूरतें पूरी होंगी। इससे नए विचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।

UBI के नुकसान और चुनौतियाँ

वित्तीय बोझ:
इतनी बड़ी जनसंख्या को नियमित आय देना सरकारों के लिए आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

काम की प्रेरणा में कमी:
आलोचकों का कहना है कि अगर लोगों को बिना काम के पैसा मिलेगा, तो इससे काम करने की इच्छा घट सकती है।

महंगाई का खतरा:
अगर एक साथ लोगों की आय बढ़ेगी, तो बाजार में वस्तुओं की मांग बढ़ेगी, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) का खतरा हो सकता है।

भारत में संभावनाएँ

भारत जैसे विकासशील देश में UBI लागू करना आसान नहीं है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शुरुआत में इसे ग्रामीण इलाकों, महिलाओं, या बेरोज़गार युवाओं पर केंद्रित किया जाए। डिजिटल पेमेंट सिस्टम और आधार जैसी व्यवस्थाएँ इस दिशा में मददगार साबित हो सकती हैं।

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