दांत हमारी सेहत का एक अहम हिस्सा हैं, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और गलत खानपान के कारण अधिकांश लोगों को दांतों की समस्या हो रही है। अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि रोजाना दो बार ब्रश करने भर से दांत स्वस्थ रहेंगे, लेकिन डेंटल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल एक छोटा हिस्सा है। दांतों को कैविटी फ्री रखने और मसूड़ों की बीमारी से बचाने के लिए सही देखभाल का तरीका अपनाना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले, सिर्फ ब्रश करना पर्याप्त नहीं है। ब्रश करने का सही तरीका भी बहुत मायने रखता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ब्रश को हल्के हाथ से गोलाकार मोशन में घुमाते हुए सभी दांतों की सतह और मसूड़ों के किनारे तक साफ करना चाहिए। कठोर ब्रश या जोर-जबरदस्ती से ब्रश करने से मसूड़े कमजोर हो सकते हैं और दांतों की एनेमल पर असर पड़ सकता है।
दूसरा, दांतों की सफाई सिर्फ सुबह और रात में ब्रश करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भोजन के बाद, खासकर मीठा या स्टार्च वाला भोजन खाने के बाद, मुँह में फंसी खाने की चीज़ें कैविटी का कारण बन सकती हैं। इस स्थिति में फ्लॉस का इस्तेमाल करना आवश्यक है। फ्लॉस दांतों के बीच फंसी गंदगी और बैक्टीरिया को निकालने में मदद करता है।
तीसरा, दांतों की देखभाल में माउथवॉश का इस्तेमाल भी फायदेमंद है। एंटीसेप्टिक माउथवॉश बैक्टीरिया को कम करता है और मसूड़ों को संक्रमण से बचाता है। हालांकि, माउथवॉश का इस्तेमाल ब्रशिंग का विकल्प नहीं बल्कि उसका पूरक होना चाहिए।
खानपान का भी दांतों की सेहत पर बड़ा असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीठे और तली-भुनी चीज़ों का सेवन सीमित करना चाहिए। पानी पीते रहना, फल और हरी सब्जियां खाने से दांतों की प्राकृतिक सफाई होती है और लार का प्रवाह बढ़कर बैक्टीरिया को कम करता है।
इसके अलावा, नियमित डेंटल चेकअप हर 6 महीने में करवाना बेहद जरूरी है। इससे कैविटी, मसूड़ों की सूजन और दांतों में होने वाले छोटे संक्रमण समय रहते पकड़े जा सकते हैं। शुरुआती स्तर पर समस्या पकड़ने से इलाज भी आसान और कम खर्चीला होता है।
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