चीनी को सफेद जहर यूं ही नहीं कहा जाता, बल्कि हर इंसान के लिए ये बहुत नुकसानदायक होती है. ना सिर्फ डायबिटीज के पेशेंट के लिए, बल्कि आम इंसान और बच्चों के लिए भी चीनी नुकसानदायक हो सकती है. खासकर बच्चों में यह फैटी लीवर की समस्या को तेजी से बढ़ा रही है, जिसे नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर भी कहा जाता है. आइए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे यह शुगर बच्चों की हेल्थ की दुश्मन है और आप कैसे इससे परहेज कर सकते हैं.
बच्चों में ओबेसिटी और फैटी लीवर का कारण है चीनी
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों में जो मोटापे की समस्या तेजी के साथ बढ़ रही है और जो बच्चे नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर की समस्या से परेशान है उसका सबसे बड़ा कारण सफेद शुगर होती है. जी हां, ताजा रिपोर्ट के अनुसार ज्यादा वजन वाले 62 प्रतिशत बच्चों में फैटी लीवर पाया गया है, जिनकी उम्र 11 से 15 साल के बीच है. यह चीनी एक तरह से स्लो प्वाइजन का काम करती है. दरअसल, प्रोसेस्ड चीनी हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप फैटी बिल्डअप का कारण बनता है, जो लीवर से संबंधित होता है. कुछ रिसर्च से पता चला है कि चीनी लीवर के लिए शराब जितनी हानिकारक हो सकती है.
कब तक बच्चों को ना खिलाएं चीनी
हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि 1 साल तक के बच्चे को नमक का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए और जब तक आपका बच्चा 2 साल का नहीं हो जाता उन्हें चीनी भी नहीं खिलाना चाहिए. अधिकतर लोग बच्चों के टेस्ट को डेवलप करने के लिए दूध में चीनी मिला देते हैं, लेकिन चीनी मिलाने से बच्चों को पेट दर्द और कब्ज की शिकायत हो सकती है और धीरे-धीरे लीवर से संबंधित समस्याएं भी शुरू होने लगती है, इसलिए कोशिश करें कि बच्चों को चीनी से दूर रखें और चीनी युक्त खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ का सेवन भी बहुत ना करवाएं.
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