सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. आइए जानते हैं उनके फर्श से अर्श तक के सफर के बारे में –
सुब्रत रॉय का जन्म 1948 में बिहार के अररिया जिले में हुआ। सुब्रत रॉय ने यूपी के गोरखपुर से अपनी पढ़ाई और कारोबार दोनों की शुरुआत की। अपनी लगन और मेहनत से इन्होंने देखते ही देखते महज 2000 रुपये से शुरू किये गए कंपनी के कारोबार को 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया। ‘सहारा श्री’ सुब्रत रॉय ने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की, जो फाइनेंस, रियल स्टेट, मीडिया और हॉस्पिटैलिटी समेत अन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
1978 में उन्होंने ‘सहारा इंडिया परिवार’ ग्रुप की स्थापना की थी। गोरखपुर से खासा लगाव होने के चलते रॉय ने मीडिया क्षेत्र हो या फिर रियल इस्टेट गोरखपुर में उनकी कंपनी ने बड़ा निवेश किया।
सुब्रत रॉय ने किराये के ऑफिस से अपने बिजनेस की शुरूआत की, जिसमें दो कुर्सियां लगी होती थीं। स्कूटर के जरिए रॉय ऑफिस आते थे। इस फाइनेंस कंपनी के जरिए सुब्रत रॉय छोटे-छोटे दुकानदारों से सेविंग्स कराते थे। कुछ समय में पूंजी बढ़ने पर इन्होंने कपड़े और पंखे की छोटी सी फैक्ट्री शुरू कर दी। स्थानीय लोगों के अनुसार वह अपने स्कूटर से ही पंखा और अन्य उत्पादों को बेचा करते थे। खुद दुकानों पर जाकर डिलीवरी करते थे और दुकानदारों को छोटी सेविंग्स के बारे में जागरूक करते थे।
एक समय ऐसा जब इनके कारोबारी मित्र एसके नाथ से संबंध बिगड़ने लगे। 1983-84 में रॉय के कारोबारी मित्र ने अलग होकर दूसरी कंपनी बना ली, जिसके बाद रॉय ने लखनऊ में अपनी कंपनी का मुख्यालय खोला और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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