आम आदमी पार्टी को पहला बड़ा झटका चंडीगढ़ मेयर चुनाव में लगा। 30 जनवरी को हुए इस चुनाव में AAP और कांग्रेस गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत था। चंडीगढ़ नगर निगम की 35 सीटों में AAP के 13, कांग्रेस के 6 और बीजेपी के 16 पार्षद थे, जबकि एक वोट सांसद मनीष तिवारी के पास था। कुल 36 में से जीत के लिए 19 वोट जरूरी थे और AAP-कांग्रेस गठबंधन के पास 20 वोट थे।
इसके बावजूद बीजेपी ने 19 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि AAP-कांग्रेस उम्मीदवार को केवल 17 वोट मिले। इस हार के पीछे AAP के तीन पार्षदों की क्रॉस-वोटिंग जिम्मेदार रही। नंबर गेम में मजबूत होने के बावजूद यह हार पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुई और आंतरिक मतभेदों को उजागर कर गई। अब पार्टी के भीतर विश्वास का संकट गहरा गया है।
2️⃣ दिल्ली विधानसभा चुनाव में शर्मनाक प्रदर्शन
2015 और 2020 में शानदार जीत के बाद 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP को तगड़ा झटका लगा। जहां 2015 में AAP ने 67 सीटें और 2020 में 63 सीटें जीती थीं, वहीं 2025 में पार्टी महज 22 सीटों पर सिमट गई। करीब 11 साल तक दिल्ली की सत्ता में बने रहने के बाद पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।
इस हार ने न केवल AAP के विकास मॉडल पर सवाल खड़े किए बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के विस्तार की महत्वाकांक्षाओं को भी बड़ा झटका दिया। यह हार पार्टी के भविष्य के लिए गंभीर संकेत है, खासकर उस वक्त जब AAP खुद को एक राष्ट्रीय विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही थी।
3️⃣ अरविंद केजरीवाल की सीट पर हार
AAP के लिए सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी परंपरागत नई दिल्ली सीट पर हार गए। बीजेपी के प्रवेश वर्मा ने उन्हें करारी शिकस्त दी। केजरीवाल की हार से पार्टी का मनोबल बुरी तरह प्रभावित हुआ।
केवल केजरीवाल ही नहीं, बल्कि मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, सोमनाथ भारती, दुर्गेश पाठक, आदिल खान, सत्येंद्र जैन और दिनेश मोहनिया जैसे पार्टी के प्रमुख नेता भी चुनाव हार गए। पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के बिना विधानसभा में कमजोर उपस्थिति AAP के लिए गंभीर सियासी संकट का संकेत है।
लगातार हार के झटकों का असर
एक हफ्ते में मिले इन तीन बड़े झटकों ने आम आदमी पार्टी को पूरी तरह हिला दिया है। इसका असर दिल्ली की सत्ता के साथ-साथ एमसीडी और पंजाब की सियासत पर भी साफ दिखने लगा है।
🏙️ एमसीडी पर मंडराता खतरा:
अप्रैल में होने वाले मेयर चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिलने की संभावना है, क्योंकि विधानसभा स्पीकर बीजेपी का होगा और वह 14 में से 13 सदस्यों को निगम में मनोनीत कर सकता है। इससे बिना किसी तोड़फोड़ के बीजेपी आसानी से एमसीडी पर कब्जा कर सकती है।
🗳️ राज्यसभा में सीटों का नुकसान:
अब AAP केवल एक ही सदस्य को राज्यसभा में भेज सकेगी, जबकि पहले वह तीनों सीटों पर कब्जा जमाती थी। यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है।
🌾 पंजाब में सियासी संकट:
पंजाब में भी AAP की मुश्किलें बढ़ रही हैं। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि AAP के 30 विधायक कांग्रेस के संपर्क में हैं और जल्द ही भगवंत मान और केजरीवाल के बीच सत्ता संघर्ष देखने को मिलेगा।
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