मोदी सरकार में हाल ही में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अपने चुनावी हलफनामे में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की जानकारी देकर सभी को चौंका दिया है। वे मोदी सरकार के पहले ऐसे मंत्री बन गए हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से यह माना है कि उन्होंने डिजिटल करेंसी यानी क्रिप्टो में निवेश किया है।
इस खुलासे ने एक ओर जहां डिजिटल संपत्ति में विश्वास को बढ़ावा दिया है, वहीं यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या अब सरकार की ओर से क्रिप्टो को लेकर नीतिगत दृष्टिकोण में बदलाव की संभावनाएं बन रही हैं?
हलफनामे में दी गई जानकारी
जयंत चौधरी ने अपने चुनावी हलफनामे में बताया कि उन्होंने लगभग ₹3.5 लाख रुपये मूल्य की क्रिप्टो संपत्तियों में निवेश किया है। यह जानकारी उनके द्वारा दाखिल नामांकन पत्र में दी गई है, जिसे सार्वजनिक कर दिया गया है।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह निवेश किस विशेष क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन, इथेरियम आदि) में किया गया है। लेकिन इतना तय है कि यह किसी भी मौजूदा केंद्रीय मंत्री द्वारा क्रिप्टो को लेकर दी गई सबसे पारदर्शी और स्पष्ट सूचना है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
भारत सरकार का रुख अब तक क्रिप्टो को लेकर सावधानीपूर्ण रहा है। हालांकि सरकार ने इसे अवैध घोषित नहीं किया है, लेकिन इसके लिए न कोई नियामक ढांचा तैयार किया गया है, न ही इसे आधिकारिक मुद्रा के रूप में मान्यता मिली है।
ऐसे में जयंत चौधरी का यह निवेश सरकार के अंदर एक नए दृष्टिकोण या सोच की ओर संकेत करता है। वित्त मंत्रालय पहले ही इस बात पर विचार कर रहा है कि क्रिप्टो संपत्तियों को किस तरह से टैक्स और नियमन के दायरे में लाया जाए।
जयंत चौधरी का प्रोफाइल
जयंत चौधरी राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष हैं और हाल ही में मोदी कैबिनेट में केंद्रीय मंत्री के रूप में शामिल हुए हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पोते हैं और युवाओं तथा किसानों के बीच अच्छी पकड़ रखते हैं। उनकी तकनीकी समझ और आधुनिक दृष्टिकोण उन्हें मौजूदा राजनीति में एक अलग स्थान दिलाती है।
क्या बदल सकती है नीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब सरकार के अंदर से कोई मंत्री क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करता है, तो यह नीति निर्माण की दिशा को प्रभावित कर सकता है। यह न केवल डिजिटल फाइनेंशियल इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा, बल्कि इससे उन निवेशकों को भी भरोसा मिलेगा जो अभी तक संशय की स्थिति में थे।
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