“मौत बेशक हकीकत है, लेकिन कुछ लोग अपने कर्मों से हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं।”
ऐसे ही एक महान शख्सियत थे जेम्स हैरीसन, जिन्हें दुनिया “द मैन विद द गोल्डन आर्म” के नाम से जानती थी। उन्होंने अपनी जिंदगी में 1173 बार रक्तदान कर 24 लाख बच्चों की जान बचाई। 88 साल की उम्र में उन्होंने 17 फरवरी को न्यू साउथ वेल्स के एक नर्सिंग होम में आखिरी सांस ली। भले ही वो अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी दरियादिली और नेकदिली उन्हें अमर बना गई।
रक्तदान का महायोद्धा – 1173 बार रक्तदान करने का रिकॉर्ड
जेम्स हैरीसन ने 1954 में 18 साल की उम्र में पहली बार रक्तदान किया और उसके बाद लगभग 63 सालों तक हर दो हफ्ते में रक्तदान करते रहे। उनकी इस सेवा के कारण उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा रक्त और प्लाज्मा दानकर्ता माना जाता है। साल 2005 में उन्होंने सबसे ज्यादा रक्तदान करने का रिकॉर्ड बनाया, जिसे 2022 में एक अमेरिकी व्यक्ति ने तोड़ा।
कैसे बना ‘गोल्डन आर्म’ – जेम्स के खून की अनोखी ताकत
जेम्स के खून में एक दुर्लभ एंटीबॉडी थी जिसे एंटी-D कहा जाता है। ये एंटीबॉडी गर्भवती महिलाओं को रीसस नामक बीमारी से बचाने के लिए इस्तेमाल होती थी। उनके ब्लड प्लाज्मा से बने एंटी-D इंजेक्शन ने लाखों अजन्मे बच्चों की जान बचाई। वैज्ञानिक भी इस बात को पूरी तरह नहीं समझ पाए कि उनके खून में ये दुर्लभ एंटीबॉडी क्यों थी।
14 साल की उम्र में खुद बची थी जान, तभी लिया था संकल्प
जब जेम्स 14 साल के थे, तब उनकी छाती की सर्जरी हुई थी, जिसके लिए उन्हें 13 यूनिट खून चढ़ाया गया। तभी उन्होंने ठान लिया था कि जब वे बड़े होंगे तो रक्तदान करेंगे। 18 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार रक्तदान किया और फिर इसे अपनी जिंदगी का मिशन बना लिया।
जेम्स के खून से बनी दवा ने उनकी ही बेटी की जान बचाई
उनके रक्त से बनी दवा उनकी बेटी और पोते-पोतियों को भी दी गई थी। यानी, उन्होंने न केवल अनगिनत अनजान लोगों की मदद की, बल्कि अपने ही परिवार की भी रक्षा की।
रक्तदान की प्रेरणा छोड़ गए जेम्स हैरीसन
उनकी दरियादिली को देखकर दुनिया भर में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ी। वे कहा करते थे कि उन्हें गर्व है कि उन्होंने इतने सारे बच्चों की जान बचाने में योगदान दिया। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो भी उनके रक्तदान के संकल्प और उनकी अनमोल विरासत को दुनिया हमेशा याद रखेगी।
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