कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप में विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना को प्राकृतिक पारिस्थितिकी के लिए ‘‘गंभीर खतरा’’ बताते हुए पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से इस परियोजना को दी गयी सभी स्वीकृतियां निलंबित करने और इसकी विस्तृत एवं निष्पक्ष समीक्षा कराने का अनुरोध किया जिसमें संबंधित संसदीय समितियों से पड़ताल कराना भी शामिल है।
यादव को लिखे पत्र में पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अपना धर्म निभाना चाहिए तथा अपने आप को महज परियोजना प्रस्तावक बनने तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, खासतौर से जब परियोजना के निश्चित रूप से ‘‘विनाशकारी’’ मानवीय, सामाजिक और पारिस्थितिकी परिणाम हों।
रमेश ने कहा, ‘‘आपको प्रश्नकाल के दौरान राज्यसभा में हमारा हालिया संवाद याद होगा। केंद्र सरकार का ग्रेट निकोबार द्वीप में 72,000 करोड़ का प्रस्तावित ‘मेगा इन्फ्रा प्रोजेक्ट’ इस द्वीप के आदिवासी समुदायों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।’’
उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के ‘‘विनाशकारी पारिस्थितिकी और मानवीय परिणाम’’ हो सकते हैं तथा इसे उचित प्रक्रिया का उल्लंघन करके एवं जनजातीय समुदायों की रक्षा करने वाले कानूनी व संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार करके आगे बढ़ाया गया है।
रमेश ने कहा, ‘‘सबसे पहले, इस परियोजना के लिए 13,075 हेक्टेयर वन भूमि (द्वीप का 15 प्रतिशत क्षेत्र) संबंधी परिवर्तन और एक राष्ट्रीय एवं विश्व स्तर पर अद्वितीय वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता होगी।’’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि इस परियोजना के परिणामस्वरूप संभावित रूप से शोम्पेन का खात्मा हो सकता है, जो विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के रूप में वर्गीकृत एक स्वदेशी समुदाय है। रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘आदिवासी समूहों की सुरक्षा के लिए सभी कानूनी और नीतिगत सुरक्षा उपायों का उल्लंघन करते हुए इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया है।’’
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