छत्तीसगढ़ की धरती पर एक ऐसी फसल ने अचानक सुर्खियां बटोरी हैं, जिसे अब तक किसान पकने पर फेंक दिया करते थे – कटहल (Jackfruit)। जी हां, वही कटहल जिसे आमतौर पर सब्जी के रूप में जाना जाता है, अब कृषि आधारित उद्योगों की नजर में एक बहुमूल्य फसल बन चुकी है।
राज्य सरकार और कृषि विशेषज्ञों की पहल पर कटहल की खेती को नए आयाम दिए जा रहे हैं। इसका प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन ऐसा आकार ले रहा है कि अब यह फल किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन रहा है।
अब कटहल नहीं जाएगा बेकार
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में कटहल की खेती पारंपरिक रूप से होती आई है, लेकिन इससे किसानों को कभी भी कोई ठोस आर्थिक लाभ नहीं मिला। अधिक पकने पर कटहल सड़ने लगता है और किसान उसे खेतों में ही छोड़ देते थे।
लेकिन अब कटहल के वेल्यू एडिशन पर काम शुरू हुआ है। इसे कटहल चिप्स, पल्प, अचार, जैम, स्लाइस और रेडी-टू-कुक उत्पादों के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिनकी बाजार में जबरदस्त मांग है।
प्रोसेसिंग यूनिट से बदलेगा परिदृश्य
राज्य सरकार की ‘रूरल एग्री-बिजनेस हब योजना’ के तहत कई जिलों में कटहल प्रसंस्करण यूनिट्स की स्थापना की जा रही है। इनमें महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों को जोड़ा जा रहा है, ताकि ग्रामीण स्तर पर ही उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी प्रक्रिया सम्पन्न हो सके।
इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग
कटहल अब सिर्फ सब्जी तक सीमित नहीं रहा। इसकी मांग वेगन फूड इंडस्ट्री, होटल इंडस्ट्री और हेल्थ कॉन्शियस मार्केट में तेजी से बढ़ी है। कटहल को ‘वेज मीट’ के रूप में भी देखा जा रहा है, खासकर शाकाहारी और शुद्ध वीगन उपभोक्ताओं के बीच।
इसके साथ ही कई स्टार्टअप कंपनियां अब ऑर्गेनिक कटहल आधारित उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बेच रही हैं, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
संभावित कमाई और निवेश
एक अनुमान के मुताबिक, यदि किसान 1 हेक्टेयर भूमि में कटहल की खेती करते हैं और उसे स्थानीय यूनिट में बेचते हैं या स्वयं प्रोसेस करते हैं, तो उन्हें सालाना ₹3 से ₹5 लाख तक की आय हो सकती है। यदि वे वैल्यू एडिशन में भागीदार बनते हैं तो यह आय ₹10 लाख तक भी पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों की राय
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि कटहल में फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद उपयोगी है और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है। सही प्रशिक्षण और विपणन रणनीति के साथ यह फसल किसानों की आर्थिक हालत में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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