क्या आपने अपने पिता को बिना किसी नॉमिनी के खो दिया है? घबराएँ नहीं—RBI और महाराष्ट्र के कानून आपको उनकी बचत और सोसाइटी फ्लैट की चाबियाँ सौंपते हैं। 15-90 दिनों में लाखों का दावा करने के लिए इस 2025 चीट-शीट का पालन करें, छोटी रकम के लिए बिना किसी अदालती झंझट के।
बैंक मनी (₹15 लाख की सीमा)
RBI के सितंबर 2025 के नियम दावों को तेज़ करते हैं:
- फॉर्म + मृत्यु प्रमाण पत्र + अपना आधार/पैन लें।
- क्षतिपूर्ति बॉन्ड + कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (तहसीलदार ₹200) जोड़ें।
- ₹15 लाख से कम? बैंक 15 दिनों में जारी करता है—कोई उत्तराधिकार प्रमाण पत्र नहीं!
- ₹15 लाख से ऊपर? न्यायालय उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (₹3-5 हज़ार शुल्क, 3-6 महीने)।
- संयुक्त खाता? उत्तरजीवी स्वतः ही स्वामित्व रखता है।
प्रो टिप: SBI/HDFC पोर्टल आपको ऑनलाइन ट्रैक करने की सुविधा देते हैं; देरी = ₹100/दिन ब्याज दंड।
मुंबई को-ऑप फ्लैट (नामांकित व्यक्ति ≠ मालिक)
बॉम्बे उच्च न्यायालय का मंत्र: “नामांकित व्यक्ति देखभालकर्ता है, उत्तराधिकारी राजा हैं।”
- श्रेणी-I के उत्तराधिकारियों (पति/पत्नी/बच्चे) को पूल करें → पारिवारिक समझौता विलेख (₹1 हज़ार स्टाम्प)।
- प्रशासन पत्र (नो-विल) या प्रोबेट (वसीयत) के लिए न्यायालय में आवेदन करें।
- उप-पंजीयक के यहाँ स्थानांतरण विलेख पंजीकृत करें (0.5% स्टाम्प शुल्क)।
- सोसाइटी को जमा करें: LoA + विलेख + NOC + मृत्यु प्रमाण पत्र।
- सोसाइटी शेयर सर्टिफिकेट को 30 दिनों में अपडेट करती है—आप आधिकारिक मालिक हैं!
लागत: कुल ₹25–50 हज़ार; 2–4 महीने।
2025 हैक्स
– हिंदू? ऑटो क्लास-I के वारिस। मुस्लिम/ईसाई? पर्सनल लॉ लागू।
– डिजिटलीकरण: ई-स्टाम्प + ई-साइन से आने-जाने की संख्या 70% कम हो जाती है।
– मुफ़्त कानूनी सहायता: ₹10 लाख से कम की संपत्ति के लिए ज़िला अदालतें।
– झगड़ों से बचें: परिवार की सहमति की वीडियो रिकॉर्डिंग करें।
अकेले मुंबई के बैंकों में ₹50 लाख का दावा न किया गया—पिताजी की विरासत को धूल न जमने दें। आज ही शुरुआत करें; कल की स्टाम्प ड्यूटी और भी ज़्यादा चुभ सकती है।
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