भारत में पारंपरिक घरेलू उपायों का चलन वर्षों से चला आ रहा है। खासकर छोटे बच्चों की देखभाल में दादी-नानी के नुस्खे आज भी कई परिवारों में अपनाए जाते हैं। ऐसे ही आमतौर पर किए जाने वाले तरीकों में से एक है—बच्चे के कान में सरसों या नारियल का तेल डालना। माना जाता है कि इससे कान का मैल साफ होता है और दर्द में भी आराम मिलता है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस प्रथा को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देता है। डॉक्टरों का मानना है कि बिना जांच के किसी भी प्रकार का तेल बच्चे के कान में डालना कई बार लाभ से अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के कान स्वाभाविक रूप से संवेदनशील होते हैं। ऐसे में उनमें कोई बाहरी पदार्थ डालने से संक्रमण, जलन या सूजन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, कान की संरचना बेहद नाजुक होती है, जहाँ ईयरड्रम (कर्णझिल्ली) पर छोटा सा दबाव भी परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए बिना विशेषज्ञ की राय लिए तेल का उपयोग करने से पहले दो बार सोचना आवश्यक है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
1. मैल खुद साफ़ करने की क्षमता
ईएनटी विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे बच्चों के कान में जो मैल जमा होता है, वह शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है। यह न केवल धूल और बैक्टीरिया को रोकता है, बल्कि अपनी प्रकृति से ही बाहर की ओर निकलने लगता है। इसलिए इसे साफ करने के लिए तेल डालने या कॉटन बड का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं होती।
2. संक्रमण का खतरा
तेल डालने से कान में नमी बढ़ती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस को बढ़ने का मौका मिलता है। यही संक्रमण आगे चलकर कान दर्द, बुखार और यहां तक कि सुनने में कमी का कारण बन सकता है।
3. कान की झिल्ली को नुकसान का जोखिम
यदि बच्चे की कर्णझिल्ली पहले से ही कमजोर हो, या उसमें हल्का सा भी छेद हो, तो तेल डालना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। कई मामलों में यह सुनने की क्षमता को क्षति पहुंचा सकता है।
4. दर्द या सर्दी के लिए सुरक्षित विकल्प
परंपरागत तरीकों की जगह डॉक्टर हल्के गुनगुने पानी की भाप, सिर पर गर्म कपड़ा रखने या चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित ड्रॉप्स को ज्यादा उपयुक्त मानते हैं। इनमें संक्रमण का खतरा कम होता है और राहत भी प्रभावी मिलती है।
कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह?
यदि बच्चे को कान में लगातार दर्द, पानी या पीप बहना, तेज रोना, बुखार, या कान को बार-बार छूने जैसी समस्या दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। कई बार ये सामान्य दिक्कतें नहीं होतीं, बल्कि मध्य कान के संक्रमण या अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकती हैं।
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