स्मार्टफोन आज हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। दिशा बताने से लेकर ऑनलाइन खरीदारी और डिजिटल भुगतान तक, हर कदम पर तकनीक हमारी सहूलियत बढ़ाती है। लेकिन सुविधा के साथ एक गंभीर सवाल भी जुड़ा है—क्या हमारी निजता सुरक्षित है? विशेषज्ञों का कहना है कि GPS बंद करने के बाद भी गूगल हमारे लोकेशन डेटा को अलग-अलग तरीकों से ट्रैक करता रहता है। यह मुद्दा अब वैश्विक बहस का विषय बन चुका है।
सबसे पहले समझना जरूरी है कि लोकेशन ट्रैकिंग केवल GPS तक सीमित नहीं है। गूगल कई वैकल्पिक स्रोतों से भी आपके स्थान का अनुमान लगा सकता है। इनमें वाई-फाई नेटवर्क, मोबाइल टावर, ब्लूटूथ बीकन और यहां तक कि आपकी सर्च हिस्ट्री और ऐप गतिविधियां भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर यदि आपने किसी दुकान, अस्पताल या रेस्तरां का नाम गूगल पर खोजा है, तो एल्गोरिद्म उस खोज के आधार पर आपकी संभावित लोकेशन का अनुमान लगा सकता है। इसी तरह यदि आपका फोन किसी विशेष वाई-फाई नेटवर्क की रेंज में है, तो आपकी स्थिति कुछ ही मीटर के दायरे में पता लगाई जा सकती है।
इसके अलावा “Location History” और “Web & App Activity” जैसी सेटिंग्स अक्सर बैकग्राउंड में सक्रिय रहती हैं। उपयोगकर्ता GPS बंद होने के बावजूद इन सेटिंग्स के चलते ट्रैक होते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई उपयोगकर्ता यह मानकर चलते हैं कि GPS ऑफ करने से लोकेशन पूरी तरह छिप जाती है, जबकि वास्तविकता कहीं अधिक जटिल है। गूगल सेवाओं को बेहतर बनाने, विज्ञापन टारगेटिंग और ट्रैफिक अपडेट जैसे उद्देश्यों के लिए लोकेशन डेटा का व्यापक उपयोग करता है।
अब सवाल यह है कि उपयोगकर्ता अपनी लोकेशन ट्रैकिंग को किस हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। तकनीकी विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले चरण में “Location History” को पूरी तरह बंद करना आवश्यक है। इसके लिए गूगल अकाउंट सेटिंग्स में जाकर “Data & Privacy” सेक्शन चुनें और वहां लोकेशन हिस्ट्री को ऑफ कर दें। इसके बाद “Web & App Activity” को भी डिसेबल करना चाहिए, क्योंकि यह फीचर ऐप और ब्राउज़र गतिविधियों के आधार पर लोकेशन का अनुमान लगाता है।
एक और महत्वपूर्ण कदम है ऐप परमिशन की जांच करना। कई ऐप्स अनावश्यक रूप से लोकेशन एक्सेस मांगते हैं। एंड्रॉयड फोन में “Settings” के अंतर्गत “Apps” या “Permissions” सेक्शन में जाकर आप तय कर सकते हैं कि कौन-सी ऐप को लोकेशन की अनुमति देनी है और किसे नहीं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन ऐप्स में लोकेशन की सच में आवश्यकता नहीं है, उन्हें “Deny” या “Allow Only While Using” पर सेट कर देना चाहिए।
वाई-फाई और ब्लूटूथ स्कैनिंग भी लोकेशन ट्रैकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भले ही वाई-फाई ऑफ हो, फोन बैकग्राउंड में आसपास के नेटवर्क स्कैन कर सकता है। इसलिए “Wi-Fi Scanning” और “Bluetooth Scanning” ऑप्शन को भी बंद करना आवश्यक है। यह सेटिंग्स अधिकतर लोग जानते ही नहीं, लेकिन गोपनीयता सुरक्षा में इनका प्रभाव बड़ा होता है।
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