डायबिटीज़ को आमतौर पर ब्लड शुगर से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन यह धारणा अधूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा न केवल आंखों, किडनी और हृदय को प्रभावित करती है, बल्कि हड्डियों पर भी गहरा प्रभाव डालती है। हाल के वर्षों में किए गए शोध बताते हैं कि टाइप-1 और टाइप-2 दोनों प्रकार के डायबिटीज़ में हड्डियों की घनत्व (Bone Density) कम होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसके कारण फ्रैक्चर का खतरा भी दोगुना हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि रोगी शुरुआती चेतावनी संकेत पहचान लें, तो हड्डियों को नुकसान से बचाया जा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि डायबिटीज़ से जुड़ी बोन वीकनेस अक्सर चुपचाप बढ़ती है और इसका पता तब चलता है जब हड्डियाँ धीरे-धीरे अपनी मजबूती खो चुकी होती हैं।
डायबिटीज़ क्यों कमजोर करती है हड्डियों को?
1. उच्च रक्त शर्करा का प्रभाव
जब शरीर में शुगर लंबे समय तक बढ़ी रहती है, तो यह हड्डियों की कोशिकाओं पर नकारात्मक असर डालती है। इससे नई हड्डी बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।
2. हार्मोनल असंतुलन
डायबिटीज़ के कारण इंसुलिन और अन्य हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, जो हड्डियों की वृद्धि और मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. नसों पर असर
डायबिटीज़ से नसों पर असर पड़ता है, जिससे व्यक्ति गिरने का शिकार अधिक होता है। इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
4. कैल्शियम अवशोषण में कमी
डायबिटीज़ शरीर की खनिज तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित करती है। नतीजतन, कैल्शियम और विटामिन D की कमी हड्डियों को समय से पहले कमजोर कर देती है।
कैसे पहचानें कि डायबिटीज़ असर डाल रही है हड्डियों पर?—महत्वपूर्ण लक्षण
1. लगातार हड्डी या जोड़ दर्द
बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार हड्डियों या जोड़ों में दर्द होना शुरुआती संकेत हो सकता है कि बोन डेंसिटी कम हो रही है।
2. चक्कर या कमजोरी के कारण गिरना
डायबिटीज़ के मरीजों में संतुलन बिगड़ना और चक्कर आना आम है। इससे गिरने की संभावना बढ़ती है, जिसका सीधा संबंध हड्डियों की कमजोरी से है।
3. कम गतिविधि के बावजूद थकान
हड्डियों के कमजोर होने पर सामान्य गतिविधि भी भारी लगने लगती है। डायबिटीज़ में यह स्थिति और अधिक बढ़ जाती है।
4. रीढ़ (Back) में हल्का दर्द
बोन लॉस होने पर सबसे पहले रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है। लगातार पीठ दर्द या झुकने में परेशानी इसका संकेत हो सकता है।
5. छोटी चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा
यदि मामूली गिरावट या हल्के आघात में भी हड्डी टूट जाए, तो यह गंभीर चेतावनी संकेत है कि हड्डियाँ संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज़ मरीजों को नियमित रूप से Bone Density Test, विटामिन D और कैल्शियम स्तर की जांच करानी चाहिए। संतुलित आहार, वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज, धूप में समय बिताना और शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना हड्डियों की सेहत के लिए अनिवार्य है।
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