इरफ़ान खान न केवल बेहतरीन अभिनेता थे, बल्कि उनकी संवेदनशीलता, सूक्ष्म हास्य और सहज व्यक्तित्व ने उन्हें अपने दौर के सबसे अनोखे कलाकारों की श्रेणी में रखा। वह अक्सर अपने दिल की बात सीधे और सरल ढंग से कहे जाते थे। हाल ही में उनके एक पुराने इंटरव्यू का ज़िक्र फिर चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा था, “मेरा बस चले तो मैं उसे घर में खरीदकर रख लूं।” इस टिप्पणी ने लंबे समय बाद भी दर्शकों को उसी गर्माहट और सादगी की याद दिला दी, जिसके लिए इरफ़ान हमेशा प्रशंसित रहे।
यह टिप्पणी उन्होंने एक पालतू जानवर—एक छोटे सड़कछाप पिल्ले—के लिए कही थी, जिसे वह एक शूटिंग के दौरान रोज़ाना देखते थे। बताया जाता है कि फिल्म की टीम जिस लोकेशन पर काम कर रही थी, वहां एक छोटा सा कुत्ता अक्सर कलाकारों के पास आ जाता था। इरफ़ान उसे दुलारते, उसके लिए खाने का इंतज़ाम करते और कभी-कभी उसके साथ समय बिताकर अपने व्यस्त शेड्यूल से राहत पाते थे। उनकी यही संवेदनशीलता अक्सर उनके किरदारों में भी झलकती थी—गहरी, मानवीय और दिल से जुड़ी।
टीम के सदस्यों के अनुसार, इरफ़ान उस दिन बेहद प्रसन्न थे जब वह पिल्ला उनके वैनिटी वैन तक चला गया। उसी दौरान उन्होंने हँसते हुए कहा कि अगर यह उन पर होता तो वह उसे घर ले जाकर रख लेते। यह बात जितनी हल्की फुल्की थी, उतनी ही उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पहलू उजागर करती है—वह छोटी-छोटी खुशियों को भी पूरे मन से अपनाने वाले इंसान थे।
इरफ़ान खान हमेशा से ही प्रकृति और जानवरों के करीब रहने वाले व्यक्ति माने जाते थे। विदेशों में शूटिंग के दौरान भी वह अक्सर स्थानीय जीव-जंतुओं को लेकर उत्सुकता प्रकट करते थे। उनके सहयोगियों का कहना है कि जानवरों के प्रति उनका लगाव सिर्फ दुलार तक सीमित नहीं था, बल्कि वह हमेशा उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाते और अपने आसपास के लोगों को भी यही सीख देते थे।
कहा जाता है कि इरफ़ान जिस भी सेट पर रहते, वहां एक सुकून का माहौल बन जाता था। उनकी उपस्थिति टीम के लिए ऊर्जा का स्रोत होती थी। अपने गंभीर किरदारों के विपरीत, वास्तविक जीवन में उनका व्यक्तित्व बेहद सरल और आत्मीय था। इसीलिए, उनका किसी छोटे पिल्ले के प्रति ऐसा लगाव जताना बिल्कुल स्वाभाविक लगता है।
इरफ़ान खान के जाने के वर्षों बाद भी उनके किस्से, उनकी मुस्कान और उनका मानवीय दृष्टिकोण लोगों के दिलों में ताज़ा बने हुए हैं। चाहे वह फिल्मों में गढ़े गए किरदार हों या इस तरह की छोटी-छोटी घटनाएँ—इरफ़ान अपनी सहजता से हर पल को यादगार बना देते थे। इस छोटे से किस्से ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह न सिर्फ एक महान कलाकार थे, बल्कि एक बेहद प्रेमपूर्ण और संवेदनशील इंसान भी थे।
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