21-22 जून की रात, अमेरिका ने ईरान के तीन अहम परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज़ और इस्फहान—पर जबर्दस्त हवाई हमला किया। इस हमले को ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ नाम दिया गया, जिसमें अमेरिका ने बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया। इन बमों का मकसद था—इन गुप्त न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह तबाह करना।
लेकिन अब जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, वे चौंकाने वाली हैं। इन तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान झुकने को तैयार नहीं है, बल्कि फिर से निर्माण कार्य में जुट गया है।
🛰️ नई सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा
Maxar Technologies द्वारा जारी ताजा सैटेलाइट इमेजेस में साफ देखा जा सकता है कि फोर्डो साइट पर फिर से खुदाई और निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। वहां बुलडोजर, ट्रक और भारी मशीनें सुरंगों के आस-पास काम कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शायद ईरान ने अमेरिका के हमले से पहले ही संवेदनशील परमाणु सामग्री को वहां से हटा लिया था। कुछ सुरंगों को जानबूझकर मिट्टी से भर दिया गया ताकि बमबारी का असर न हो। अब ताजा मिट्टी और बनी नई सड़कों को देखकर सवाल उठ रहे हैं—क्या ईरान इस साइट को फिर से एक्टिव करने की तैयारी में है?
🇮🇷 ईरान क्या फिर से शुरू कर रहा है न्यूक्लियर प्रोग्राम?
हालात यह इशारा कर रहे हैं कि ईरान या तो अपनी परमाणु क्षमताएं दोबारा खड़ी कर रहा है, या फिर उन्हें दुनिया की निगाहों से छिपाने की नई रणनीति बना रहा है।
🇺🇸 अमेरिका और IAEA की प्रतिक्रियाएं
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि फोर्डो में 60% तक समृद्ध यूरेनियम मौजूद था, लेकिन यह साफ नहीं है कि हमले के समय वह वहां था या नहीं।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का दावा है कि अमेरिका का हमला बिल्कुल सटीक था और साइट की क्षमताओं को खत्म कर दिया गया है।
IAEA ने भी पुष्टि की है कि फिलहाल फोर्डो की सेंट्रीफ्यूज मशीनें ऑपरेशनल नहीं हैं, लेकिन ग्राउंड स्तर की पुष्टि के लिए या तो निरीक्षण या खुफिया इनपुट की जरूरत है।
उधर, ईरानी सांसद और मीडिया लगातार इस ओर इशारा कर रहे हैं कि जवाबी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में पूरा पश्चिम एशिया एक बार फिर तनाव के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है।
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