ईरान ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों की पेशानी पर बल पड़ गए हैं।
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद करामी को IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की ग्राउंड फोर्स का नया कमांडर नियुक्त किया है।
यह वही करामी हैं जिन पर 2019 और 2022 के जन आंदोलनों को बेरहमी से कुचलने के आरोप हैं और जिन्हें अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने प्रतिबंधित कर रखा है।
⚔️ कौन हैं मोहम्मद करामी और क्यों मचा है पश्चिमी देशों में हड़कंप?
करामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान के सैन्य ढांचे में तेज़ी से बदलाव हो रहा है।
पूर्व ग्राउंड कमांडर मोहम्मद पाकपौर को IRGC का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया है, और उनकी सिफारिश पर करामी को यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
खामेनेई के आदेश में लिखा गया:
“आपके सैन्य अनुभव, प्रतिबद्धता और क्षमताओं को देखते हुए, आपको IRGC की ज़मीनी सेना की कमान सौंपी जाती है।”
🩸 ‘ब्लडी फ्राइडे’ के लिए याद किए जाते हैं करामी
मोहम्मद करामी का नाम खासकर 28 अक्टूबर 2022 को हुए ज़ाहेदान नरसंहार से जुड़ा है, जिसे ‘ब्लडी फ्राइडे’ कहा गया।
इस घटना में लगभग 100 लोगों की जान चली गई, जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलीबारी की।
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि इस हिंसा की योजना और क्रियान्वयन में करामी की सीधी भूमिका थी।
🌍 करामी का अंतरराष्ट्रीय विवादों से पुराना नाता
2019: सरकार विरोधी आंदोलनों में कथित गोलीबारी के आदेश
2022: राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों को कुचलने का नेतृत्व
पश्चिमी प्रतिक्रिया: अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में करामी को ब्लैकलिस्ट किया।
📍 सिस्तान-बलूचिस्तान में करामी का कड़ा शासन
करामी को 2019 में कुद्स हेडक्वार्टर का प्रमुख बनाया गया था, जो मुख्यतः ईरान के संवेदनशील और अशांत इलाके सिस्तान-बलूचिस्तान और केरमान को कवर करता है।
बाद में उन्हें इब्राहिम रईसी सरकार में उसी प्रांत का गवर्नर भी नियुक्त किया गया। इन क्षेत्रों में करामी की सख्ती और कार्रवाई को लेकर हमेशा आलोचना होती रही है।
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