साइबर अपराध नियंत्रण की दिशा में भारत की रणनीति: समन्वय, तकनीक और प्रशिक्षण का मॉडल

भारत में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए, सरकार ने एक संगठित और बहुस्तरीय रणनीति के तहत उन्हें नियंत्रित करने के कई महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अतः साइबर अपराध की रोकथाम, जांच और अभियोजन राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। हालांकि, केंद्र सरकार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस दिशा में तकनीकी, कानूनी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

इसका सबसे प्रमुख उदाहरण भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना है, जो गृह मंत्रालय के अधीन संचालित होता है। I4C का उद्देश्य साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटना है। इसके तहत, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) बनाया गया है, जहां नागरिक सीधे साइबर अपराधों की रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ मामलों में।

वित्तीय साइबर अपराध की रोकथाम के लिए 2021 में CFCFRMS प्रणाली शुरू की गई, जिसने अब तक 5,489 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि को धोखाधड़ी से बचाया है। इसके अलावा, टोल-फ्री नंबर 1930 के माध्यम से नागरिकों को त्वरित सहायता भी प्रदान की जा रही है।

देश में साइबर जाँच को प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला की स्थापना नई दिल्ली में की गई है। यह अब तक 12,460 से अधिक मामलों में सहायता कर चुका है। साथ ही, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराध रोकथाम योजना (CCPWC) के अंतर्गत राज्यों को फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना व प्रशिक्षण हेतु सहायता दी जा रही है।

I4C के तहत CYCLOPS (SiteTrac) MOOC प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से 1 लाख से अधिक पुलिस अधिकारियों को साइबर जांच, फोरेंसिक और अभियोजन संबंधी ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है। प्रतिबिंब जैसे विश्लेषणात्मक मॉड्यूल अपराध की भौगोलिक दृष्टि से निगरानी और कार्रवाई की सुविधा देते हैं।

इसके अलावा, ‘सहयोग’ पोर्टल IT मध्यस्थों के साथ संपर्क बढ़ाने और गैरकानूनी डिजिटल कंटेंट को हटाने के लिए प्रभावी साधन बना है। अभी तक 9 केंद्रीय और 34 राज्य एजेंसियों को इस पोर्टल से जोड़ा जा चुका है।

इन सब प्रयासों के चलते अब तक 10,599 अभियुक्त गिरफ्तार, 26,096 संपर्क स्थापित और 63,019 साइबर जांच सहायता अनुरोध पूरे किए जा चुके हैं।