राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शनिवार को जयपुर के हरमाड़ा स्थित रविनाथ आश्रम में आयोजित एक सम्मान समारोह में देश की वैश्विक भूमिका और शक्ति की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे प्राचीन और आध्यात्मिक राष्ट्र है, जिसकी भूमिका ‘बड़े भाई’ जैसी है।
💬 “शक्ति के बिना प्रेम की भाषा नहीं समझता संसार”
डॉ. भागवत ने पाकिस्तान पर हालिया सैन्य कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि भारत शांति चाहता है, परन्तु शक्ति के बिना शांति की बात कोई नहीं सुनता।
“दुनिया तभी प्रेम और मंगल की भाषा सुनती है जब आपके पास शक्ति हो। यही इस संसार का स्वभाव है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत किसी से शत्रुता नहीं रखता, लेकिन शक्ति संपन्न राष्ट्र बनना समय की आवश्यकता है।
🕉 “हिंदू धर्म का कर्तव्य है विश्व कल्याण”
उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्व कल्याण हिंदू धर्म की परंपरा और कर्तव्य है।
“ऋषियों की इस परंपरा को आज संत समाज आगे बढ़ा रहा है। हमें अपने धर्म के अनुरूप पूरी दुनिया के लिए काम करना चाहिए।”
🙏 त्याग और परोपकार की परंपरा
डॉ. भागवत ने भगवान श्रीराम से लेकर भामाशाह तक के उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की संस्कृति में त्याग और सेवा की गहरी परंपरा है।
उन्होंने संत रविनाथ महाराज के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनकी करुणा और प्रेरणा से स्वयंसेवकों को सदैव दिशा मिलती रही है।
📍 पुष्कर दौरा और सम्मान समारोह
इस अवसर पर भावनाथ महाराज ने मोहन भागवत को विशेष सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम में संघ के कई प्रचारक, संतजन और श्रद्धालु मौजूद रहे।
संघ प्रमुख आज पुष्कर भी जाएंगे, जहां वे वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी राणा के बेटे की शादी में शामिल होंगे। इस समारोह में बीजेपी और संघ के कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
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