वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि वस्तुओं के मामले में भारत का चीन के साथ सबसे अधिक व्यापार घाटा है, लेकिन 2014-15 से 2023-24 के दौरान यह अंतर उससे पिछले 10 वर्षों की तुलना में कम गति से बढ़ा है।
राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गोयल ने बताया कि 2004-05 से 2013-14 के दौरान व्यापार घाटा 42.85 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा लेकिन 2014-15 से 2023-24 के दौरान यह घटकर 6.45 प्रतिशत रह गया।
गोयल ने कहा ‘‘यह स्पष्ट रूप से पिछले दस वर्षों के दौरान चीन से अत्यधिक आयात की वृद्धि दर को नियंत्रित करने में सरकार की सफलता को दर्शाता है।’’
उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान देने योग्य है कि 2004-05 से 2013-14 तक व्यापार घाटा लगभग 24.8 गुना बढ़ा, जबकि 2014-15 से 2023-24 तक यह केवल 1.75 गुना बढ़ा है।
गोयल ने कहा, ‘‘भारत का चीन के साथ सबसे अधिक व्यापारिक व्यापार घाटा है। 2023-24 में चीन को भारत का निर्यात 16.65 अरब अमरीकी डॉलर था, जबकि आयात कुल 101.75 अरब अमरीकी डॉलर था, जिससे व्यापार घाटा 85 अरब अमरीकी डॉलर से अधिक हो गया।
चीन 2023-24 में 118.4 अरब अमेरिकी डॉलर के दोतरफा वाणिज्य के साथ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है।
गोयल ने यह भी कहा कि चीन से आयातित अधिकांश सामान पूंजीगत सामान, मध्यवर्ती सामान और दवा सामग्री, विभिन्न उपकरणों के कलपुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे और मोबाइल फोन के कलपुर्जे जैसा कच्चा माल हैं, जिनका उपयोग तैयार उत्पाद बनाने के लिए किया जाता है। इन उत्पादों को भारत से बाहर भी निर्यात किया जाता है।
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