भारत ने 5G के सफल रोलआउट के बाद अब 6G की दिशा में भी तेज़ कदम बढ़ा दिए हैं। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 के मंच से यह ऐलान किया गया कि देश में जल्द ही 6G तकनीक के ट्रायल शुरू किए जाएंगे। इस ऐलान के साथ ही भारत ने वैश्विक तकनीकी परिदृश्य पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
तीन दिवसीय इस मेगा इवेंट में दुनिया भर से टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जुड़े दिग्गजों ने भाग लिया और भारत की 6G विजन को न केवल सराहा, बल्कि इसमें निवेश और सहयोग का भरोसा भी जताया।
क्या कहा सरकार और इंडस्ट्री लीडर्स ने?
IMC 2025 के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा,
“भारत 6G के विकास में दुनिया का नेतृत्व करने को तैयार है। हम स्वदेशी तकनीक के दम पर इसे आगे बढ़ाएंगे और इसमें वैश्विक सहयोग का भी स्वागत है।”
इसके अलावा रिलायंस जियो, एयरटेल और वीआई जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने भी 6G ट्रायल में सहयोग देने और R&D में निवेश बढ़ाने की बात कही।
6G से क्या बदल जाएगा?
6G तकनीक वर्तमान 5G से कई गुना तेज होगी। अनुमान है कि 6G की स्पीड 1 टेराबिट प्रति सेकंड तक पहुंच सकती है। इसके जरिए
होलोग्राफिक कम्युनिकेशन,
रीयल-टाइम टेलीपोर्टेशन,
और AI-पावर्ड नेटवर्किंग संभव होगी।
स्मार्ट सिटीज, इंडस्ट्री 5.0, और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों में यह तकनीक क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
भारत की तैयारियां कितनी मजबूत हैं?
भारत सरकार ने पहले ही भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट जारी कर दिया है। इसके तहत साल 2025 से ट्रायल और 2030 तक कमर्शियल रोलआउट का लक्ष्य रखा गया है। IIT मद्रास और IIIT हैदराबाद जैसे संस्थानों को 6G रिसर्च हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इसके अलावा भारत ने इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के साथ मिलकर वैश्विक 6G मानकों के निर्धारण में भी भागीदारी शुरू कर दी है।
ग्लोबल एक्सपर्ट्स का भरोसा
अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, और यूरोप से आए तकनीकी विशेषज्ञों ने भारत के 6G मिशन को तकनीकी रूप से मजबूत और समय से पहले तैयार बताया। कई विदेशी कंपनियों ने भारत में 6G टेस्टबेड में निवेश की घोषणा भी की।
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