शरीर में यूरिक एसिड का संतुलन हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। जब यह स्तर सामान्य से ऊपर चला जाता है, तो यह कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है। शुरुआत में भले ही इसके लक्षण मामूली लगें, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह गठिया (Gout) जैसी दर्दनाक बीमारी का रूप ले सकता है। आइए जानें यूरिक एसिड बढ़ने के कारण, इसके लक्षण, होने वाली बीमारियां और घरेलू उपायों के बारे में।
यूरिक एसिड क्या है?
यूरिक एसिड शरीर में मौजूद प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनता है। प्यूरीन ज्यादातर प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। जब शरीर में यह अम्ल अधिक मात्रा में बनने लगे या इसका उत्सर्जन सही से न हो पाए, तो यह खून में जमा होकर जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में बैठने लगता है, जिससे सूजन और दर्द होता है।
यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य कारण:
- बहुत अधिक प्रोटीनयुक्त भोजन (मांस, मछली, दालें, बीयर आदि)
- ज्यादा अल्कोहल का सेवन
- मोटापा और अनियमित जीवनशैली
- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर
- किडनी की कमजोरी
यूरिक एसिड बढ़ने पर होने वाली समस्याएं:
- गठिया (Gout):
सबसे आम और गंभीर समस्या। जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और लालिमा होती है, खासकर अंगूठे के जोड़ में। - किडनी स्टोन:
अधिक यूरिक एसिड किडनी में क्रिस्टल बनाकर पथरी का कारण बनता है। - जोड़ों की स्थायी क्षति:
यदि इलाज न हो तो जोड़ों की बनावट में बदलाव और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
यूरिक एसिड कंट्रोल करने के घरेलू उपाय:
- पानी खूब पिएं:
ज्यादा पानी पीने से शरीर से अतिरिक्त यूरिक एसिड बाहर निकलने में मदद मिलती है। - नींबू पानी:
नींबू में सिट्रिक एसिड होता है, जो यूरिक एसिड को तोड़ने में मदद करता है। खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पिएं। - सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar):
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। दिन में एक बार एक चम्मच ACV पानी में मिलाकर लें। - हाई प्यूरीन फूड्स से बचें:
जैसे लाल मांस, समुद्री भोजन, मटर, राजमा, बीयर, फ्राई चीज़ें आदि। - फाइबर युक्त चीजें खाएं:
जैसे ओट्स, फल, हरी सब्जियां, जो शरीर को साफ करने और पाचन को ठीक करने में सहायक हैं।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
- यदि जोड़ों में लगातार सूजन और तेज दर्द हो
- यूरिन में जलन या रुकावट महसूस हो
- बार-बार किडनी स्टोन की समस्या हो
यूरिक एसिड का स्तर समय रहते कंट्रोल न किया जाए, तो यह गंभीर बीमारियों की शुरुआत कर सकता है। जीवनशैली में थोड़ा बदलाव, सही खानपान और नियमित व्यायाम से इसे काबू में रखा जा सकता है। यदि लक्षण बढ़ते जाएं, तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
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